सेना में भर्ती की नई योजना 'अग्निपथ' (Agnipath scheme) के विरोध में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ (Aligarh) में शुक्रवार, 17 जून को जमकर बवाल हुआ. प्रदर्शनकारियों ने बसों में तोड़-फोड़ और आगजनी की. पुलिस चौकी फूंक दी. पुलिस के वाहन पर पथराव किया. पुलिस चौकी पर खड़े वाहनों को आग के हवाले कर दिया. खबर है कि सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ बवाल शाम साढ़े चार बजे के बाद तक जारी रहा.
अलीगढ़: 'अग्निपथ' के विरोध में भाजपा के चेयरमैन की स्कॉर्पियो फूंकी, पुलिस चौकी में भी लगाई आग
अलीगढ़ के टप्पल में हिंसा रोकने पहुंचे आगरा ज़ोन के एडीजी राजीव कृष्ण की गाड़ी पर प्रदर्शनकारियों ने पथराव कर सीसा तोड़ दिया


अग्निपथ योजना को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. प्रदर्शनकारी युवाओं का आंदोलन उग्र होते दिख रहा है. अलीगढ़ में शुक्रवार, 17 जून को विरोध प्रदर्शन का दूसरा दिन था. यहां दोपहर में प्रदर्शनकारी युवाओं ने अलीगढ़ के टप्पल में यमुना एक्सप्रेस-वे पर रोडवेज बस में तोड़-फोड़ की और एक्सप्रेस-वे पर जाम लगा दिया.
पुलिस चौकी में लगाई आग, वाहन फूंकेप्रदर्शनकारियों ने पुलिस चौकियों को भी निशाना बनाया. पथराव करते हुए भारी संख्या में प्रदर्शनकारी टप्पल थाना क्षेत्र के जट्टारी पुलिस चौकी पहुंच गए और चौकी फूंक दी. इतना ही नहीं, पुलिस चौकी पर खड़े वाहन को भी आग के हवाले कर दिया.
जट्टारी में ही प्रदर्शनकारियों ने भाजपा नेता और नगर पंचायत अध्यक्ष (चेयरमैन) राजपाल सिंह की स्कॉर्पियो गाड़ी को भी आग के हवाले कर दिया.

आजतक से जुड़े अकरम खान के मुताबिक अलीगढ़ में बवाल और अनियंत्रित हो चुके उपद्रव को कंट्रोल करने के लिए आगरा ज़ोन के एडीजी राजीव कृष्ण टप्पल पहुंचे. इस दौरान उनकी गाड़ी को भी नहीं छोड़ा गया और एडीजी की गाड़ी पर पथराव किया गया, जिससे उनकी सरकारी कार का पिछला ग्लास टूट गया.

यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार के मुताबिक अलीगढ़ में उपद्रवियों ने टप्पल के पास रोडवेज बस के टायर में आग लगा दी थी. इसके अलावा अन्य जगहों पर भी कुछ घटनाएं हुई, जहां पुलिस ने मौके पर ही लोगों को शांत कराया. इसके बाद जगह-जगह कड़ी निगरानी रखी जा रही है.
केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 14 जून को 'अग्निपथ' योजना का ऐलान किया था. लेकिन, सेना में भर्ती की इस नई योजना को लेकर बवाल शुरू हो गया. इस योजना को लेकर प्रदर्शनकारी युवाओं की मुख्य रूप से दो चिंताएं हैं. पहली ये कि इसमें स्थायी नौकरी नहीं है. चार साल बाद ही 75 फीसदी लोगों की सर्विस खत्म हो जाएगी. दूसरी ये कि पुरानी भर्ती योजना के तहत सैनिकों को जो पेंशन और स्वास्थ्य बीमा की सुविधा मिलती थी, वो अब इन 75 फीसदी लोगों पर लागू नहीं होगी.






















