हिंसा के बाद छात्रों की मांग है कि JNU वीसी को पद से हटाया जाए.
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी यानी जेएनयू. पांच जनवरी को यहां हिंसा हुई. इस हिंसा के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. दिल्ली में गुरुवार यानी 9 जनवरी को छात्रों ने मार्च निकाला. यह मार्च मंडी हाउस से एचआरडी मंत्रालय की तरफ निकाला गया. हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस मार्च को शास्त्री भवन के पास रोक दिया. वहीं शाम को जेएनयू के छात्रों ने राष्ट्रपति भवन की तरफ मार्च निकाला. वे जेएनयू के कुलपति जगदीश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रहे थे.
इस मार्च को भी पुलिस ने बीच में ही रोक दिया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया. लाठीचार्ज भी किया. इसमें कुछ छात्रों को चोट आई है. लाठीचार्ज के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की.
JNUSU ने ट्वीट कर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. जेएनयूएसयू ने कहा,
'शाम के 6 बजे के बाद का वक्त है. क्या पुलिस बता सकती है कि कुछ महिला प्रदर्शनकारियों को कथित रूप से सूर्यास्त के बाद बिना किसी महिला अधिकारी की मौजूदगी के क्यों उठाया गया?'
इससे पहले एचआरडी मंत्रालय के अधिकारियों और जेएनयू प्रतिनिधिमंडल के बीच एक बैठक हुई. बैठक के बाद जेनयूएसयू की अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा कि जब तक कुलपति एम जगदीश कुमार को नहीं हटाया जाता किसी भी तरह की बात नहीं होगी. उन्होंने कहा कि मंत्रालय बात करना चाहता है तो यूनिवर्सिटी कैम्पस आए. JNU में 5 जनवरी की हिंसा में कुछ नकाबधारी गुंडों ने कैंपस के अंदर तोड़-फोड़ की. स्टूडेंट्स और टीचर्स को पीटा. करीब 34 स्टूडेंट्स घायल हुए. इनमें JNUSU की प्रेसिडेंट आइशी घोष भी शामिल थीं. उनके सिर पर गहरी चोट आई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हंगामे वाले दिन पुलिस शाम करीब 7.45 पर यूनिवर्सिटी के अंदर घुसी थी, जबकि पुलिस को कैंपस के अंदर मच रहे बवाल के बारे में दोपहर 3 बजे ही खबर मिल गई थी. आइशी घोष ने पुलिस के कुछ अधिकारियों को वॉट्सऐप मैसेज करके कैंपस के अंदर के हालात के बारे में बताया था. आइशी ने दोपहर 3 बजे वसंत कुंज पुलिस स्टेशन के SHO ऋतुराज, एक इंस्पेक्टर संजीव मंडल और स्पेशल कमिश्वर ऑफ पुलिस आनंद मोहन को मैसेज किए थे. जानकारी दी थी कि कैंपस के अंदर हथियारों के साथ कुछ गुंडें मौजूद हैं. पुलिस अधिकारियों ने ये मैसेज कुछ ही मिनट बाद पढ़ भी लिए थे, लेकिन कैंपस के अंदर पुलिस शाम 7 के बाद पहुंची.
JNU हिंसा के बाद एडमिनिस्ट्रेशन ने मंत्रालय से जो मांग की, वो कोई नहीं चाहेगा