श्रीलंका जैसे हालात अब इराक में भी देखने को मिल रहे हैं. वहां हजारों नागरिकों ने राष्ट्रपति भवन और सरकारी इमारतों पर धावा बोल दिया है. सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में लगभग 20 लोगों कई मौत हो चुकी है. इराक में सरकार के गठन को लेकर लगभग एक महीने से गतिरोध चल रहा है. सोमवार, 29 अगस्त को शिया मुस्लिम धर्मगुरु मुक्तदा अल-सदर ने राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया. जिसके बाद हालात और बिगड़ गए. सदर के समर्थक विरोध प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति भवन में घुस गए.
मौलाना के ऐलान के बाद दंगा हो गया, गोली चली, 20 से ज्यादा मारे गए!
सुरक्षाबल वाले आंसू गैस के गोले दाग रहे हैं, गोली चल रही है, 300 से ज्यादा घायल, इराक में हालत खराब!


पिछले साल अक्टूबर में इराक में चुनाव करवाए गए थे. इसमें शिया धर्मगुरु मौलाना मुक्त-दा अल-सदर की पार्टी ने 329 सीटों वाली संसद में 73 सीटें जीतीं लेकिन मौलाना सदर ने अन्य दलों के साथ मिलकर काम करने से इनकार कर दिया था इसलिए गठबंधन की सरकार का गठन नहीं हो पाया.
अल-सदर के समर्थकों ने जुलाई में सरकार बनाने से रोकने के लिए संसद में प्रदर्शन किया. वो लगभग एक महीने से धरने पर बैठे हैं. इस्तीफे की खबर से उनके समर्थक ज्यादा उग्र हो गए हैं. उन्होंने बगदाद के ग्रीन जोन के बाहर एक-दूसरे पर पत्थर फेंके. ग्रीन जोन में मंत्रालयों और दूतावासों में रहने वालों के घर हैं. खबर है कि अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों को हेलीकॉप्टर से ग्रीन जोन से बाहर निकाला गया.
बगदाद में गोलियों की आवाज गूंजीप्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबल आंसू गैस के गोले दाग रहे हैं. इस बीच भीड़ प्रेसीडेंट्स पूल में स्विमिंग भी कर रही है. धर्मगुरु के समर्थक रिपब्लिकन पैलेस के स्विमिंग पूल में मस्ती कर रहे हैं.
मीडिया रिपोटर्स के मुताबिक सेंट्रल बगदाद में गोलियों की आवाज भी गूंजी. अब तक झड़पों में 300 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है.
देश में कर्फ्यू लागूझड़पों की घटनाओं के बाद इराक की सेना ने देश में कर्फ्यू लागू कर दिया है. इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों से ग्रीन जोन छोड़ने की अपील की है.
बता दें इराक में मौलाना मुक्तदा अल-सदर के बड़ी संख्या में समर्थक हैं. सदर की पार्टी इस समय इराकी संसद में सबसे बड़ी पार्टी है. अल-सदर इस्तीफे के बाद उनके गुट ने संसद से इस्तीफा भी दे दिया है.
इराक में पिछले 10 महीने से ना तो कोई स्थाई प्रधानमंत्री है ना कोई मंत्रिमंडल है और ना ही कोई सरकार है. इस वजह से वहां राजनीतिक अराजकता की स्थिति बन गई है. फिलहाल वहां निवर्तमान प्रधानमंत्री मुस्तफा अल-कदीमी देश चला रहे हैं.
देखें वीडियो- इराक की संसद पर शिया धर्मगुरू के कब्जे की पूरी कहानी!






















