बिहार के सियासी ड्रामे के क्लाइमेक्स का दि एंड हो गया है. 20 महीने तक महागठबंधन के साथ सीएम रहे नीतीश कुमार अपने मंत्रियों के साथ राजग के सीएम के तौर पर शपथ ले चुके हैं. इस पूरे गुणा भाग से सियासत के लोगों को भले ही अच्छा या बुरा महसूस हो रहा हो, लेकिन बिहार के लोगों में एक उम्मीद सी जगी है. उम्मीद इस बात की कि पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान आरा में जो पैकेज देने का वादा किया था, अब वो पूरा हो जाएगा. आपको वह दिन याद तो होगा ही, जब पीएम ने बिहार के लोगों को स्पेशल पैकेज देने की घोषणा की थी. नहीं याद है तो बता देते हैं. साल था 2015 और तारीख थी 18 अगस्त. पीएम आरा में एक रैली को संबोधित कर रहे थे. बोले,
भाइयो-बहनो, आज मैं आरा की धरती से, भाइयो-बहनो आज मैं बाबू वीर कुंवर सिंह की पवित्र धरती से, भाइयो-बहनो आज मैं जयप्रकाश नारायण के आशीर्वाद से बिहार के पैकेज की घोषणा यहीं से करता हूं.
पीएम की घोषणा करने का वो निराला अंदाज तो याद ही होगा. पूछ रहे थे, 50 हजार करूं कि ज्यादा करूं, 60 हजार करूं कि ज्यादा करूं, 70 हजार करूं कि ज्यादा करूं, 75 हजार करूं कि ज्यादा करूं , 80 हजार करूं कि ज्यादा करूं 90 हजार करूं कि ज्यादा करूं. भाइयो-बहनो मैं आज वादा करता हूं, कान ठीक करके सुन लीजिए, दिल्ली सरकार 1.25 लाख करोड़ रुपये देने की घोषणा करती है.
आप भी सुनिए क्या कहा था मोदी जी ने
तब से अब तक 18 महीने बीत चुके हैं, लेकिन बिहार के लोगों ने ठीक से कान खोलकर जो सुना, वो अब भी अधूरा ही है. जब नीतीश कुमार महागठबंधन के सीएम थे तो मार्च 2017 में विधानसभा में बिहार के मंत्री राजीव रंजन सिंह ने एक सवाल का जवाब दिया था. इसमें बताया था कि केंद्र की ओर से 30 योजनाओं के लिए 28,117.23 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिनमें से 6,608.77 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. इसमें से बचे हुए 96,885.77 करोड़ की मांग भी बिहार सरकार कर चुकी है, जो पूरी नहीं हुई है.
हालांकि आरटीआई से ही सामने आया है कि यह पैसा भी उन योजनाओं का है, जो योजना आयोग (जो अब भंग हो चुका है और उसकी जगह नीती आयोग ने ले ली है) ने बिहार के लिए 11वीं पंचवर्षीय योजना 2012-2017 के लिए तय की थीं. इस पंचवर्षीय योजना का कार्यकाल भी इस साल के अंत तक खत्म हो जाएगा.
'यह package नहीं fackage की घोषणा करता है.' 
बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार की ओर से लगाई गई आरटीआई के जवाब में केंद्र सरकार की ओर से बताया गया है कि मोदी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में बिहार के लिए 1,888 करोड़ रुपये जारी किए हैं. 2016-17 में बिहार को कितने पैसे दिए गए हैं, इस बात का जवाब केंद्र की ओर से नहीं दिया गया है. इससे पहले 7 मार्च 2017 को लालू यादव ने भी ट्वीट कर कहा था,
अास लगाए बैठे हैं लोग
अब जब पीएम मोदी को उनका 'अपना' मुख्यमंत्री मिल गया है, तो बिहार के लोग भी अपने पैसे के इंतजार में बैठ गए हैं. इसके अलावा नीतीश कुमार जो हमेशा से बिहार के लिए स्पेशल स्टेट का दर्जा मांगते रहते हैं, उसके मिलने का रास्ता भी दिखने लगा है. केंद्र की जो योजनाएं चल रहीं हैं, उनमें केंद्र का हिस्सा मात्र 60 फीसदी है, जबकि राज्य सरकार योजनाओं के लिए 40 फीसदी देती है. नीतीश ने महागठबंधन की सरकार के दौरान यह भी मांग की थी कि केंद्र का हिस्सा बढ़ाकर 90 फीसदी कर दिया जाए. राजग सरकार के आने के बाद नीतीश की इस मांग की भी पूरी होने की उम्मीद दिखने लगी है.
मई में जब नीति आयोग की बैठक हुई थी, तब भी नीतीश कुमार ने मांग की थी कि विकसित भारत और विकसित बिहार के सपने को साकार करने के लिए इसे स्पेशल स्टेट का दर्जा दिया जाए. रघुराम राजन की कमेटी भी इस बात की संस्तुति कर चुकी है कि भारत के 10 सबसे पिछड़े हुए राज्यों के विकास के लिए केंद्र की ओर से ज्यादा मदद मिलनी चाहिए. अब पीएम मोदी अपनी सरकार के मुख्यमंत्री के लिए इतना तो कर ही सकते हैं.
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