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श्याम देहाती: एक शिक्षक जिसने भोजपुरी गानों के पॉपुलर ट्रेंड को तोड़ने के बजाय उसे मजबूत ही किया

कोरोना से हुआ निधन. डबल मीनिंग वाले गाने लिखने के आरोप लगते रहे थे.

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Shyam Dehati ने निरहुआ, खेसारी लाल यादव, पवन सिंह, रानी चटर्जी जैसे पॉपुलर भोजपुरी स्टार्स की फिल्मों में गाने लिखे. फोटो सोशल मीडिया से ली गई है.
श्याम देहाती. भोजपुरी सिनेमा का एक बड़े नाम. बीते 19 अप्रैल को उनका निधन हो गया. श्याम कोरोना वायरस संक्रमण से जूझ रहे थे. दो दिन पहले ही वे पॉजिटिव पाए गए थे. जिसके बाद उन्हें गोरखपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
श्याम देहाती के निधन के बाद भोजपुरी इंडस्ट्री में दुख की लहर दौड़ गई. कई सितारों ने उनकी मौत पर दुख व्यक्त किया और श्रद्धांजलि अर्पित की.
श्याम देहाती के साथ काम कर चुके भोजपुरी गायक और अभिनेता खेसारी लाल यादव ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए ट्वीट किया-
"हम सभी की लाख कोशिश के बाद भी हमारा भाई श्याम देहाती अब नहीं रहा. ये मेसेज हमसे शेयर नहीं किया जा रहा. मन बहुत भारी हो गया है. भाई आप अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन आपका लिखा हर गीत हम सभी के बीच आपके होने का एहसास दिलाएगा. भगवान आपकी पवित्र आत्मा को शांति दे."
पवन सिंह ने भी इस दुखद मौके पर इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए श्याम देहाती को श्रद्धांदलि दी. उन्होंने लिखा-
"भोजपुरी इंडस्ट्री के सर्वोत्तम गीतकार में से एक श्री श्याम जी अब हम लोगों के बीच नहीं रहे. ईश्वर इन्हें अपने चरणों में स्थान दे."

 

इसी तरह अंजना सिंह ने भी इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए श्रद्धांजलि दी. उन्होंने लिखा-
"यह सुनकर बहुत दुख हुआ कि श्याम देहाती जी हमारे बीच नहीं रहे. ईश्वर उनके परिवार को यह दुख सहने की शक्ति दें."
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श्याम देहाती ने कई पॉपुलर भोजपुरी कलाकारों की फिल्मों में गाने लिखे हैं. इनमें खेसारी लाल यादव, काजल राघवानी, दिनेश लाल यादव निरहुआ, प्रदीप पांडे चिंटू, पवन सिंह और रानी चटर्जी के नाम प्रमुख हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत निरहुआ की फिल्म 'निरहुआ रिक्शेवाला' का गीत 'मिसिर जी तू तो बड़ा ठंडा' के साथ की थी. इसके बाद वे पॉपुलर हो गए.
हालांकि, उनके ऊपर डबल मीनिंग और सेमी पॉर्न कैटेगरी में आने वाले गाने लिखने के आरोप भी लगे. जैसे- 'माल का बेटा मामा कहता है', 'लहंगा के गीजर', 'जबसे चढ़ल जवनिया लहंगा एसी खोजता है', 'बियहवा के बाद मिलेगा' आदि.
इस संबंध में हमने दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेद में हिंदी के एसिस्टेंट प्रोफेसर मुन्ना पांडे से बात की. वे दिल्ली सरकार की मैथिली-भोजपुरी एकेडमी में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने हमें बताया-
"भोजपुरी इंडस्ट्री में जिस तरह का ट्रेंड बना दिया गया है. मतलब अश्लीलता और फूहड़ता के जरिए पॉपुलर होने का ट्रेंड, उसे श्याम देहाती ने तोड़ा नहीं बल्कि मजबूत ही किया. इस ट्रेंड के अनेक पॉपुलर कलाकारों की तरह की श्याम देहाती ने भी यही शॉर्टकट अपनाया. दुख की बात ये है कि इस इंडस्ट्री में आने से पहले वे एक शिक्षक थे."
उन्होंने बताया कि श्याम देहाती कहा करते थे कि वो तो वही लिखते हैं, जो जनता सुनना चाहती है. इसी तरह की बात दूसरे भोजपुरी कलाकार भी कहते हैं. लेकिन अभी डॉक्टर सागर ने 'बंबई में का बा' नाम का गीत लिखा था. इसे तो जनता ने बहुत सराहा. यह गीत पलायन की त्रासदी को दिखाता है. जनता ने भी इस गीत को खूब प्यार दिया.

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