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सोशल मीडिया पर और सख्ती? IT समेत बड़े मंत्रालय हटवाएंगे 'आपत्तिजनक' पोस्ट और वीडियो?

भारत सरकार के आईटी एक्ट, 2000 की धारा 69A के तहत किसी भी तरह के कॉन्टेंट को ब्लॉक करने का अंतिम अधिकार सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पास है. दूसरे मंत्रालय केवल अपनी सिफारिशें भेज सकते हैं. सिफारिशों की जांच के बाद आईटी मंत्रालय एक्शन लेता है.

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सरकार सोशल मीडिया पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है. (तस्वीर- Unsplash.com)

केंद्र सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद कॉन्टेंट को कथित तौर पर कंट्रोल करने के लिए नियमों में बदलाव करने की तैयारी में है. मौजूदा नियमों के तहत केवल आईटी मंत्रालय ही आपत्तिजनक पोस्ट या वीडियो को  हटाने का आदेश दे सकता है. लेकिन सरकार अब कई और मंत्रालयों को ये अधिकार देने जा रही है.

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भारत सरकार के आईटी एक्ट, 2000 की धारा 69A के तहत किसी भी तरह के कॉन्टेंट को ब्लॉक करने का अंतिम अधिकार सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पास है. दूसरे मंत्रालय केवल अपनी सिफारिशें भेज सकते हैं. सिफारिशों की जांच के बाद आईटी मंत्रालय एक्शन लेता है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अब केंद्र सरकार गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी सीधे कॉन्टेंट हटाने का आदेश देने की शक्ति देने की तैयारी में है. इसके साथ ही शेयर बाजार को रेगुलेट करने वाली संस्था SEBI को भी यह अधिकार दिया जा सकता है, ताकि सोशल मीडिया पर फर्जी वित्तीय सलाह देने वाले इन्फ्लुएंसर्स पर नकेल कसी जा सके.

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इस बदलाव की जरूरत क्यों?

सरकार का मानना है कि मौजूदा सिस्टम के तहत कॉन्टेंट हटाने में ज्यादा समय लगता है. जबकि आज के दौर में चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए फैलाई जा रही भ्रामक खबरों और डीपफेक वीडियो पर तुरंत एक्शल लेने की जरूरत है. पिछले महीने सरकार ने आपत्तिजनक कॉन्टेंट हटाने की समयसीमा 24 घंटे से घटाकर 2-3 घंटे कर दिया था.  

फिलहाल भारत में सोशल मीडिया से कॉन्टेंट हटाने के दो तरीके हैं : -

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सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69(A)- इसकी मदद से राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लंघन करने वाली या भारत की विदेश नीति को खतरा पहुंचाने वाले कॉन्टेंट को हटाया जाता है. अलग-अलग मंत्रालय और राज्य सरकार के नोडल अधिकारी ऐसे कॉन्टेंट जुटाते हैं. फिर इसे सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों को भेजते हैं.

आईटी अधिनियम की धारा 79 (3) (B) - इसके तहत अलग-अलग मंत्रालय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने के लिए सीधे अनुरोध करते हैं. ये अनुरोध आमतौर पर गृह मंत्रालय के नियंत्रण वाले सहयोग पोर्टल की मदद से किया जाता है. नए प्रस्ताव का मकसद दोनों व्यवस्थाओं के बीच समानता लाना है ताकि हर मंत्रालय स्वतंत्र रूप से काम कर सके.

चिंताएं क्या हैं?

सरकार इसे सुरक्षा और कॉन्टेंट ब्लॉकिंग में तेजी के लिहाज से जरूरी बता रही है. लेकिन कुछ जानकार और यूजर्स ने चिंता भी जाहिर की है. उनका मानना है कि सख्त नियमों के चलते व्यंग्य या आलोचना करने वाले पोस्ट भी हटाए जा सकते हैं. दूसरा कंपनियों को बहुत कम समय में फैसला लेना होगा. ऐसे में वो सतही तौर पर जांच के बाद कॉन्टेंट हटा सकती है ताकि लीगल एक्शन से बचा जा सके. इससे इन्फ्लुएंसर्स को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है. 

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