गुजरात के मोरबी में 10 साल पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने एक पुलिसकर्मी को पांच साल जेल की सजा सुनाई है (Gujarat Passport Verification Bribe). पुलिसकर्मी पर पासपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगा था. अब वो दोषी पाया गया है. स्थानीय कोर्ट ने पुलिसकर्मी पर जुर्माना भी लगाया है.
पासपोर्ट बनवाते समय कोई पुलिसवाला आपसे रिश्वत मांगे तो ये खबर दिखा देना!
गुजरात के मोरबी में 10 साल पहले पासपोर्ट वेरिफिकेशन के दौरान एक पुलिसकर्मी ने महिला से रिश्वत मांगी थी. कोर्ट ने अब कड़ी सजा सुनाई है.


आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला साल 2014 का है. पूजा नाम की महिला ने केन्या अपने पति के पास जाने के लिए पासपोर्ट बनवाया था. पासपोर्ट ऑफिस जाकर डॉक्यूमेंटेंशन का काम किया. उसके बाद उनका पुलिस वेरिफिकेशन होना बचा था. 17 मार्च को पूजा को मालिया पुलिस थाने से फोन आया और वेरिफिकेशन के लिए वहां बुलाया गया. जब पूजा वहां गई तो कॉन्सटेबल अमरत मकवाणा ने उनसे साइन कराए और फिर 500 रुपये मांगे. इस पर पूजा ने सवाल किया कि डॉक्यूमेंटेशन के दौरान सारी फीस भर दी गई है तो उससे किस बात के पैसे मांगे जा रहे हैं.
आरोप लगे कि पुलिसकर्मी ने अगले दिन फिर से फोन पर महिला से 500 रुपये मांगे और कहा कि पैसे नहीं दिए तो पासपोर्ट नहीं बनेगा. पूजा ने मामले की जानकारी अपने परिवार वालों को दी.
इसके बाद पूजा के देवर मनोज ने कॉन्सटेबल की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो से कर दी. खबर है कि ACB की टीम ने जाल बिछाकर आरोपी कॉन्सटेबल को रंगे हाथ अरेस्ट किया. मामला कोर्ट पहुंचा. अब आरोपी दोषी पाया गया है. अदालत ने आरोपी अमरत मकवाणा को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा के तहत दोषी ठहराते हुए 5 साल की कठोर कारावास और 1 हजार रुपये जुर्माने भरने की सजा सुनाई है.
गरीबों से EMI में रिश्वत ली जा रही है!कुछ महीने पहले जून में गुजरात के कुछ अधिकारियों पर 'सहानुभूतिपूर्वक भ्रष्टाचार' के आरोप लगे थे. खबर आई कि अफसरों ने गरीब लोगों से एकमुश्त कर्ज लेने के बजाय हर माह की किश्त में भुगतान करने की ‘छूट’ दे दी. साल 2024 में ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा ऐसे 10 मामले दर्ज किए गए हैं. मार्च 2024 में एक व्यक्ति से SGST फर्जी बिलिंग घोटाले में 21 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी. इस रकम के लिए कई भुगतान किए गए. इनमें दो-दो लाख रुपये की 9 और एक लाख रुपये की एक EMI का भुगतान किया गया था.
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टाइम्स ऑफ इंडिया से जुड़े आशीष चौहान की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा ही एक मामला 4 अप्रैल को सूरत से आया. इसमें एक उप सरपंच और तालुका पंचायत सदस्य ने गांव के एक शख्स के खेत को समतल करने के लिए 85,000 रुपये की रिश्वत मांगी. आरोपियों ने पीड़ित को EMI से भुगतान का विकल्प दिया.
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