कुल पांच मांगे हैं. इनमें से ऐसी कौन सी मांग है, जो नहीं मानी जा सकती है. या इनमें कौन सी ऐसी मांग है, जिसे किसी भी स्थिति में नाजायज कहा जा सकता है. कोई भी तो नहीं. देश की तीसरी सबसे बेहतरीन यूनिवर्सिटी में ये सुविधाएं तो होनी ही चाहिए. लेकिन इसके लिए लड़कियां तीन दिन से धरना-प्रदर्शन कर रही हैं और बीएचयू प्रशासन देर रात इन लड़कियों पर लाठीचार्ज कर रहा है.
वीसी को बुलाया जा रहा गेट पर, वो हॉस्टल में मिलने आ रहे हैं
आंदोलन कर रही लड़कियों की मांग थी कि बीएचयू वीसी प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी लंका गेट पर आकर प्रदर्शनकारी छात्राओं से मुलाकात करें और उनकी मांगों को माने जाने का आश्वासन दें. लेकिन वीसी लड़कियों से डेलिगेशन से मिलने के लिए त्रिवेणी हॉस्टल पहुंच गए. वहां लड़कियों ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया और कहा कि बात सबके सामने होगी. इस पर वीसी भड़क गए, जिसके बाद लड़कियों ने हंगामा कर दिया और उन्हें वहां से हटने पर मजबूर होना पड़ा.वीसी के विरोध का वीडियो
जो प्रॉक्टोरियल बोर्ड छेड़खानी पर चुप रहता है, विरोध प्रदर्शन पर लाठियां चलाता है
त्रिवेणी हॉस्टल से निकलने के बाद रात करीब 10 बजे लड़कियों ने वीसी आवास का घेराव किया. लड़कियों ने अपनी पुरानी ही मांग दुहराई कि वीसी घर से निकलें और लंका गेट पर आकर छात्राओं से मुलाकात करें. लड़कियों का कहना है कि इस छोटी सी बात पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मी भड़क गए. ये वही लोग थे, जिनसे लड़कियों ने छेड़खानी की शिकायत की थी तो कहा गया था कि आप 7 बजे के बाद हॉस्टल से बाहर न निकलें. इन लोगों ने तुरंत ही लाठियां निकाल लीं और छात्राओं पर चलाना शुरू कर दिया. इस लाठीचार्ज में कई लड़कियों को गंभीर चोटें आई हैं.ये लाठीचार्ज का वीडियो है
आंसू गैस के गोले और रबर बुलेट दागती रही पुलिस
त्रिवेणी हॉस्टल पर जब प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षा गार्ड ने लाठीचार्ज किया, तो लड़कों का भी गुस्सा भड़क गया. उन्होंने अपने हॉस्टलों से पथराव कर दिया. कुछ पेट्रोल बम भी फेंके गए, जिसमें एक-दो सुरक्षाकर्मियों को चोटें आईं. इसके बाद मौके पर 23 थानों की फोर्स, पीएसी और आरएएफ तैनात कर दी गई, जिसने लाठियों, टियर गैस और रबर बुलेट से छात्राओं का मुकाबला शुरू कर दिया. छात्राओं के हॉस्टल में तालेबंदी कर दी गई और उनकी लाइट काट दी गई. अंधेरे में अपने बचाव में लगी छात्राओं को पुलिस ने बेरहमी से पीटा. एक छात्रा का भागते वक्त पैर फंस गया, तो उसके पैर पर पुलिस ने इतनी लाठियां मारीं कि उसे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा.बीएचयू प्रशासन कह रहा है लाठीचार्ज नहीं हुआ, फिर ये तस्वीरें कैसी हैं
बीएचयू में लड़कियों पर लाठीचार्ज हुआ है. कई लड़कियां और लड़के गंभीर रूप से घायल हैं. कुछ को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा है. पूरा कैंपस पुलिस की छावनी में बदल गया है, लेकिन बीएचयू प्रशासन लाठीचार्ज से ही इनकार कर रहा है. बीएचयू के प्रवक्ता राजेश सिंह कह रहे हैं कि लाठीचार्ज नहीं हुआ है, जो छात्राएं प्रदर्शन कर रही हैं, वो बीएचयू की नहीं हैं. राजेश सिंह की बात को कोई भी कैसे मान सकता है, जब लड़कियां चीख-चीखकर अपने ऊपर पड़ी पुलिस की लाठियों की चोट दिखा रही हैं और अपने डिपार्टमेंट का भी नाम बता रही हैं.जिस लड़की को चोट आई है, उसकी बातें सुनिए
'कुछ लोग आंदोलन तोड़ने की भी कोशिश में हैं'

इसी पोस्टर को लेकर छात्राओं के बीच मतभेद हो गए थे, जिसके बाद पोस्टर हटा लिया गया.
तीन दिन के बाद भी छात्राएं आंदोलन की धार में कमी नहीं आने दे रही हैं. ये जरूर हुआ है कि छात्रों का एक गुट इस आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है. आंदोलन से जुड़ी छात्राओं का कहना है कि ये कोई राजनैतिक मांग नहीं, बस लड़कियों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है. और ये मांग हर विचारधारा से जुड़ी लड़की की मांग है. हालांकि उनका आरोप है कि छात्र संगठन ABVP के लोग इसे कमजोर करना चाहते हैं. इसकी एक बानगी तब भी देखने को मिली, जब बीएचयू के गेट पर प्रदर्शन के दौरान UNSAFE BHU का पोस्टर लगाया गया था. कुछ लोगों ने इस पोस्टर का विरोध किया. मामला बिगड़ न जाए और मुद्दा बदल न जाए, इसलिए प्रदर्शनकारी छात्राओं ने इस पोस्टर को हटाने की मांग भी मान ली.
#अबकी बार बेटी पर वार और #UNSAFE BHU कर रहा ट्रेंड
बीएचयू में तीन दिन से चल रहे हंगामे के बाद ट्विटर और फेसबुक पर भी लोग बीएचयू वीसी के खिलाफ गुस्सा दिखाने लगे हैं. #अबकी_बार_बेटी_पर_वार और #UnSafeBHU ट्रेंड कर रहा है. बीएचयू से जुड़े लोग और वहां के स्टूडेंट्स फेसबुक पेज BHU Buzz और BHU world पर पूरा घटनाक्रम शेयर कर रहे हैं.आंदोलन के पीछे कुछ और वजहें तो नहीं हैं

BHU के वीसी प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी, जो नवंबर 2017 में रिटायर होने वाले हैं.
लड़कियों से छेड़खानी हुई, जिसके बाद ये लड़कियां खुलकर सामने आईं हैं. अपना विरोध दर्ज करवा रहीं हैं. पुलिस की लाठियां भी खा रही हैं. लेकिन इस आंदोलन के समर्थन के पीछे एक और वजह बताई जा रही है. बीएचयू को जानने वाले लोग बताते हैं कि बीएचयू में हमेशा से ठाकुर बनाम ब्राह्मण की लड़ाई चलती रही है. इस बार भी ऐसा ही हो रहा है. वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी का कार्यकाल नवंबर 2017 में पूरा हो रहा है. उनकी जगह पर नए वीसी की नियुक्ति होनी है, जिसके लिए बीएचयू के ही एक प्रॉक्टर दावेदारी कर रहे हैं. वो जाति से ठाकुर हैं और ब्राह्मण वीसी के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इस आंदोलन को धार मिलने के पीछे उनकी भी बैकिंग बताई जा रही है.
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