प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) COP 28 में हिस्सा लेने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जाएंगे. रिपोर्ट के मुताबिक PM मोदी 30 नवंबर और 1 दिसंबर को UAE के दुबई में रहेंगे. इस साल संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (UN Climate Change Conference) UAE की अध्यक्षता में दुबई में आयोजित किया जा रहा है. ये सम्मेलन 30 नवंबर से 12 दिसंबर, 2023 तक चलेगा. इस दौरान पार्टियों के सम्मेलन (Conference of the Parties) की 28वीं बैठक यानी COP 28 में PM मोदी शामिल होंगे.
दो दिन के लिए दुबई क्यों जा रहे हैं PM मोदी?
PM मोदी UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के निमंत्रण पर दुबई जा रहे हैं. अपने दो दिन के दुबई दौरे के दौरान PM मोदी COP 28 में शामिल होने वाले दूसरे नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक PM मोदी UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के निमंत्रण पर दुबई जा रहे हैं. अपने दो दिन के दुबई दौरे के दौरान PM मोदी COP 28 में शामिल होने वाले दूसरे नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे.
पिछले तीन सालों में PM मोदी दूसरी बार जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं. इससे पहले PM मोदी ने 2021 में ग्लासगो में हुए COP 26 सम्मेलन में हिस्सा लिया था. इस दौरान उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत की पांच विशिष्ट लक्ष्यों वाली 'पंचामृत' नीति और मिशन लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (LiFE) की घोषणा की थी. PM मोदी ने 2015 के सम्मेलन में भी हिस्सा लिया था, जब ऐतिहासिक पेरिस समझौते को अंतिम रूप दिया गया था.
2015 के COP 21 में 190 से ज्यादा देशों ने पेरिस समझौते पर सहमति जताई थी. इस समझौते के तहत वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की बात हुई थी. इसका मकसद ग्लोबल वॉर्मिंग यानी गर्म होती जा रही पृथ्वी के लिए उपाय करना था. PM मोदी ने 2015 के सम्मेलन में भी हिस्सा लिया था.
COP 28 का एजेंडाCOP 28 का मुख्य एजेंडा जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में प्रगति की समीक्षा करना है. खासकर, पेरिस समझौते को पूरा करने के उपायों पर गौर करना और इसके लिए उठाए जा रहे कदमों को मजबूत करने पर निर्णय लेना.
लगभग 30 साल पहले, 150 से अधिक देशों ने पृथ्वी को तपा रहे प्रदूषण में खतरनाक बढ़ोतरी को सीमित करने के लिए एक संयुक्त राष्ट्र संधि पर हस्ताक्षर किए थे. इसके तहत पहला कॉन्फ्रेंस 1995 में बर्लिन, जर्मनी में हुआ था. इस कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP) में संधि पर हस्ताक्षर करने वाले सदस्य देशों ने हिस्सा लिया था. तब से लगभग हर साल जलवायु परिवर्तन पर सम्मेलन हो रहा है.
हर साल होने वाले इस सम्मेलन का मकसद ये रहता है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को कैसे सीमित किया जाए. उसके लिए तैयारी कैसे की जाए. इसमें दुनिया भर के नेता जलवायु परिवर्तन से निपटने के समाधान पर एकसाथ काम करने के लिए जुटते हैं.
वीडियो: फाइटर जेट तेजस में बैठकर PM मोदी ने उड़ान भरी






















