नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन्द्र 'बालेन' शाह (Balen Shah) इन दिनों जबरदस्त फॉर्म में हैं. शपथ लेने के 48 घंटों के भीतर ही उन्होंने कई बड़े फैसले लिए हैं. इनमें कुछ फैसले विवादित भी माने जा रहे हैं, जिनमें से एक है- छात्र राजनीति पर पूरी तरह से बैन लगाना. शाह ने ये सभी फैसले अपने 100 दिन के एक्शन प्लान के तहत लिए हैं, जिसका मकसद शिक्षा को राजनीति से दूर रखना और इसे बेहतर बनाना है.
छात्र राजनीति बैन, पूर्व PM अरेस्ट, भारत से संपर्क... प्रधानमंत्री बनते ही बालेन शाह के ताबड़तोड़ फैसले
Nepal के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने 100 दिन का एक्शन प्लान पेश किया है. इसके तहत उन्होंने कई बड़े फैसले लिए है. इनमें से एक है छात्र राजनीति पर पूरी तरह से बैन लगाना. इस फैसले की आलोचना भी खूब हो रही है.


35 साल की उम्र में बालेन शाह दशकों बाद नेपाल के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने हैं. उनकी नई-नवेली 'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' ने 5 मार्च को हुए आम चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल की. जनता के बीच अपनी लोकप्रियता और जनादेश हासिल करने के बाद, अब उनके सामने एक बहुत बड़ी चुनौती है युवा नेपालियों की उम्मीदों पर खरा उतरना. लेकिन वही Gen Z जिसने प्रोटेस्ट के जरिए उन्हें सत्ता तक पहुंचाया, अब उन्हीं के पंख कतरे जाने की आशंका जताई जा रही है.
कैंपस से राजनीति को बाहर रखना
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बालेन शाह सरकार के शुरुआती फैसलों में से एक यह था कि राजनीतिक छात्र संगठनों को कैंपस से बाहर कर दिया जाए. उनकी जगह पर 90 दिनों के अंदर 'स्टूडेंट काउंसिल' या 'वॉयस ऑफ स्टूडेंट्स' जैसे गैर-राजनीतिक संगठन बनाए जाएंगे. अपने गानों के जरिए युवाओं के विद्रोह को हवा देने के बाद, अब उनका तर्क है कि कैंपस को राजनीति का अड्डा नहीं बनना चाहिए.
बड़ी पार्टियों और माओवादी गुटों से जुड़े छात्र संगठनों पर लंबे समय से हिंसा, तोड़फोड़ और वसूली के आरोप लगते रहे हैं. एग्जाम में देरी हो रही है, टीचरों पर हमला हो रहा है, और लेक्चर हॉल में पार्टी के झंडे लहरा रहे हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका एकमात्र समाधान यही है कि शिक्षा को राजनीति के चंगुल से आजाद कराया जाए.
लेकिन आलोचकों को इसमें एक अलग ही तस्वीर नजर आती है. लिबरल्स का कहना है कि इस कदम से लोकतांत्रिक भागीदारी पर रोक लग सकती है और पॉलिटिकल लीडरशिप के लिए एक जरूरी ट्रेनिंग ग्राउंड (जो यूनिवर्सिटी-कॉलेज कैंपस माना जाता है) कमजोर हो सकता है.
इसके अलावा, सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ाव रखने पर भी रोक लगा दी है. सरकारी संस्थाओं के भीतर मौजूद राजनीतिक ट्रेड यूनियनों को भी खत्म कर दिया जाएगा.
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव
कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए इंटरनल एग्जाम खत्म कर दिए गए हैं. उनकी जगह मूल्यांकन के लिए दूसरे तरीके अपनाए जाएंगे. साथ ही स्कूलों-कॉलेजों को अपने विदेशी नाम बदलकर नेपाली में रखने का आदेश दिया गया है. जो संस्थान ऑक्सफ़ोर्ड, पेंटागन, सेंट जोसेफ़ और सेंट ज़ेवियर्स जैसे विदेशी नामों का इस्तेमाल करते हैं. उन्हें इस साल से अपने नाम बदलने होंगे.
इसके अलावा, सरकार स्नातक (अंडरग्रेजुएट) पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए नागरिकता की शर्त को हटा देगी. साथ ही रिजल्ट जारी करने के लिए एक सख्त एकेडमिक कैलेंडर लागू करेगी. देरी होने पर एक्शन भी हो सकता है.
प्रतिद्वंद्वी गिरफ्तार
शनिवार, 28 मार्च को पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को भी पुलिस ने हिरासत में लिया. यह कार्रवाई सितंबर 2025 में हुए Gen Z प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और मौतों के मामले में की गई है. इसी प्रदर्शन के बाद ओली सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी थी. एक अलग मामले में, विधायक रेखा शर्मा को नाबालिग के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. उस समय काठमांडू के मेयर रहे बालेन शाह ने पीड़ित को न्याय दिलाने का वादा किया था.
Gen Z आंदोलन में मारे गए प्रदर्शनकारियों को सम्मान
सरकार Gen Z प्रदर्शनों के दौरान मारे गए 27 छात्रों के परिवारों को नौकरियां देगी. यह फैसला पहली कैबिनेट बैठक में ही मंजूर कर लिया गया था और अब इसे लागू भी किया जा रहा है.
भारत से संपर्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ‘X’ पर हुई बातचीत में, बालेन शाह ने कहा कि वे नई दिल्ली के साथ ‘करीब से काम करने के लिए उत्सुक’ हैं. उन्हें भारत के मामले में थोड़ा सख़्त माना जाता है. शाह को भेजे गए बधाई संदेश में, PM मोदी ने भारत-नेपाल संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की बात कही थी. शाह ने उनकी बात से सहमति जताई.

काठमांडू के मेयर के तौर पर, बालेन शाह अक्सर खुलकर राष्ट्रवाद का प्रदर्शन करते थे. भारत के नए संसद भवन में 'अखंड भारत' भित्तिचित्र के जवाब में उन्होंने अपने ऑफिस में 'ग्रेटर नेपाल' का नक्शा लगाया, जिसमें वर्तमान भारत के कुछ हिस्से नेपाल के क्षेत्र के रूप में दिखाए गए थे. उनके बयान ने नई दिल्ली की भौंहें चढ़ा दी थीं.
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