रिपोर्ट के मुताबिक, इत्र कारोबारी को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा. इसके लिए उसका मेडिकल चेकअप कराया जा रहा है. गिरफ्तारी से पहले जैन से 50 घंटे से भी अधिक पूछताछ की गई. रविवार को उसके कन्नौज स्थित पैतृक आवास भी छापा मारा गया, खबर लिखे जाने तक उसके पैतृक आवास पर नोटों की गिनती जारी थी. अधिकारियों के मुताबिक उसके कई अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी अभी जारी है.
जांच एजेंसियों को जैन के ठिकानों से अब तक अकूत नगदी और जूलरी के साथ-साथ 16 बेशकीमती प्रॉपर्टी के दस्तावेज भी मिले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, जैन के कन्नौज में 7, कानपुर में 4, मुंबई में 2 और दिल्ली में एक बेशकीमती प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक है. उसने दुबई में भी दो प्रॉपर्टी खरीद रखी हैं. रखता था पुरानी गाड़ियां रिपोर्ट के अनुसार, अकूत संपत्ति का मालिक पीयूष जैन लोगों और जांच एजेंसियों की नजरों में ना आए, इसके लिए वो बहुत ही साधारण तरीके से रहता था. उसने अपने पास दो पुरानी गाड़ियां रख रखी थीं. इनमें से एक गाड़ी का तो इन्श्योरेंस भी खत्म हो चुका है. यही नहीं, जैन एक से डेढ़ साल में घर की रखवाली के लिए रखे गए चौकीदार भी बदलता रहता था, ताकि उसकी असलियत कहीं से लीक ना हो जाए. उसके घर में नौकर भी नहीं थे.

लोगों और एजेंसियों की नजरों से बचे रहने के लिए Piyush Jain पुरानी गाड़ियां रखता था. (फोटो: इंडिया टुडे)
पीयूष जैन को टैक्स चोरी के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है. कानपुर में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के ज्वाइंट कमिश्नर सुरेंद्र कुमार ने बताया कि नकली रसीदों के जरिए टैक्स चोरी की जा रही थी. इस बीच इत्र एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है. अपने पत्र में एसोसिशन ने जैन के इत्र व्यापारी ना होने की बात कही है. संगठन की तरफ से कहा गया है कि जैन की कारगुजारियों को इत्र के व्यापार से जोड़कर ना देख जाए और एजेंसियां इस मामले की तह तक जाएं.
इससे पहले जांच एजेंसियों ने 22 दिसंबर को पीयूष जैन के ठिकानों पर छापेमारी की शुरू की थी. उस वक्त जैन अपने पिता के इलाज के सिलसिले में दिल्ली में था. एजेंसियों के बुलाने पर जैन को दिल्ली से कानपुर पहुंचना पड़ा. अकूत संपत्ति बरामद होने के बाद से यह भी कहा जा रहा है कि हो ना हो जैन के राज नेताओं से संपर्क जरूर रहे होंगे, क्योंकि बिना राजनीतिक संरक्षण के इतनी ज्यादा संपत्ति इकट्ठा कर लेना समझ से परे है. हालांकि, अभी तक यह पता नहीं चला है कि जैन के किन नेताओं और राजनीतिक पार्टियों से संबंध हैं.
























