पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर पिछले साल मोदी सरकार ने बैन लगा दिया था. सरकार का कहना था कि ये संगठन देश विरोधी गतिविधियां चला रहा है. लेकिन, अब खबर ये है कि PFI से जुड़े लोगों ने सरकारी बैन का काट निकाल लिया है. इंडियाटुडे से जुड़े मो. हिज्बुल्लाह की सीक्रेट रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक में PFI एक दूसरे नाम से पूरी तरह सक्रिय है. और उसके सदस्य नए संगठन के जरिए अपना मकसद पूरा कर रहे हैं.
बैन आतंकी संगठन PFI अब भी एक्टिव! सदस्यों ने तोड़ निकाला, अरब से पैसा भी आ रहा
स्टिंग में खुलासा, बैन के बाद भी PFI कर्नाटक में काम कर रहा.


रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) नाम का एक संगठन है. कई लोग इसे PFI का ही राजनीतिक संगठन तक मानते हैं. अब SDPI में PFI वाले शामिल हो गए हैं और ऐसा लगातार जारी है. ये लोग SDPI में आकर अपने पुराने एजेंडे को आगे भी बढ़ा रहे हैं.
इंडियाटुडे के स्टिंग ऑपरेशन में PFI नेता चांद पाशा ने कहा,
इस काम में कौन मदद कर रहा?'मैं अपने इलाके में संगठन को लगातार मजबूत कर रहा हूं, वीडियो जारी कर रहा हूं, वॉट्सऐप के जरिए मुस्लिम वोटरों के बीच अपनी विचारधारा फैला रहा हूं. हम सभी PFI के ही कार्यकर्ता हैं, हम लगातार अपने समर्थकों के बीच मंथन करते हैं, जो उम्मीदवार जीत सकता है, इस पर चर्चा करते हैं. हम बस BJP को हराना चाहते हैं.'
चांद पाशा ने ये भी बताया कि कौन लोग PFI के लोगों को जोड़ने में मदद कर रहे हैं. उनके मुताबिक,
‘इलाके में 30 से 50 मस्जिद हैं, उनके 10 से 15 प्रेसिडेंट हैं. उन सभी ने फिर 10 से 15 ग्रुप बना रखे हैं. अब कोई भी संदेश देना होता है तो एक क्लिक से कई हजार लोगों तक आसानी से मैसेज पहुंच जाता है.’
इंडियाटुडे के मो. हिज्बुल्लाह के मुताबिक कर्नाटक के चिकमंगलुरु के साथ राज्य के दक्षिण इलाके में भी पीएफआई ने अपने पैर मजबूत कर रखे हैं. यहां भी बड़ी ही चालाकी से उसके कार्यकर्ता SDPI के साथ जुड़ गए हैं. SDPI पर कोई बैन नहीं है, इसलिए किसी को शक नहीं होता.
इस बारे में इंडियाटुडे ने SDPI से जुड़े आसिफ से भी बात की.
आसिफ ने बताया,
कहां से मिल रहा मोटा पैसा?'मैं आपको ऑफ रिकॉर्ड ये बता रहा हूं कि PFI ही अब SDPI बन गया है... जांच एजेंसियां इस समय PFI के किसी भी शख्स को गिरफ्तार नहीं कर पाएंगी. कोई सबूत ही नहीं मिलने वाला है. सब पीछे से काम कर रहे हैं. कोई डॉक्यूमेंट मौजूद ही नहीं है, जो ये बता सके किअब ये शख्स PFI के साथ जुड़ा हुआ है.'
PFI अगर इतना सब कुछ कर पा रहा है, तो उसके पीछे फंड भी एक बड़ी वजह है. ये फंड उसके पास लगातार आ रहा है. SDPI के आसिफ ने इस बारे में बताया. बोले,
'गल्फ यानी खाड़ी देशों से सबसे ज्यादा पैसा आ रहा है. वहां के कुछ लोग यहां लोकल में रहते हैं, जो इन्हें पैसे भी देते हैं और दूसरी जरूरी सामग्री भी.'
जब PFI पर बैन लगा था, तब चुनाव आयोग ने SDPI का जिक्र भी किया था. तब कहा गया था कि ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं जिससे ये साबित हो जाए कि PFI और SDPI के बीच कोई कनेक्शन है.
बहरहाल, पहले कभी इन दोनों संगठनों के बीच कोई कनेक्शन भले ना रहा हो. लेकिन आजतक की पड़ताल के बाद ये साफ़ है कि अब SDPI फैमिली में ज्यादातर सदस्य PFI वाले हैं.
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