सोना का बिस्कुट, ड्रग्स, चरस इन सब की स्मगलिंग की खबरें तो बहुत पढ़ी और सुनी होंगी. पर कभी सुना है कि पालतू जानवरों की भी स्मगलिंग होती है. खासकर कुत्तों की और इस स्मगलिंग के चक्कर में कुत्तों की जान खतरे में है. हाल ही में दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी वालों ने एक औरत को पकड़ा. ये औरत यूरोप से आई थी. उसने अपने पालतू कुत्ते को लगेज बैग में भर रखा था. वो बेचारा डॉगी बेसुध कपड़ों के बीच में पड़ा था. जब सिक्योरिटी वालों ने पूछा कि ये क्या तमाशा है, तो औरत ने बताया कि उसने अपने कुत्ते को खुद ही बेहोशी की दवा दी थी और बैग में रख कर यहां लाई है. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में कुत्तों की स्मगलिंग के चार मामले सामने आ चुके हैं. सूत्र बताते हैं कि जानवरों के मालिक पेपर वर्क से बचने के लिए ऐसा करते हैं.
कस्टम ऑफिसर का कहना है कि बेहोशी की दवा बार-बार अपने पालतू जानवरों को देना खतरे से भरा है. एक्स-रे मशीन के रेडियेशन भी उनके लिए हार्मफुल है. ताज्जुब होता है कि बस पेपर वर्क से बचने के लिए लोग अपने पालतू जानवरों की जान जोखिम में डालते हैं. एयरपोर्ट के टर्मिनल T-3 से करीब 25 हजार लोग रोज आते-जाते हैं. सबकी चेकिंग करना मुश्किल है. कस्टम के लोग बस सोने और नार्कोटिक की जांच कर सकते हैं.
इस तरह का एक और मामला है. दिल्ली की एक औरत अमेरिका से अपने कुत्ते को ला रही थी. चेक इन के टाइम सिक्योरिटी वालों ने धर लिया. एनओसी दिखाने को कहा, तो बोली नहीं है. कस्टम वालों ने कुत्ते को जब्त कर लिया. फिर क्या, वो औरत भी रोने-गाने लगी. और मना कर दिया एयरपोर्ट से जाने के लिए. फिर कस्टम के एक ऑफिसर ने उसे अपने ऑफिस में रहने दिया. तीन दिनों तक वो औरत वहीं रही. जब एनओसी बन कर आ गया तो फिर सिक्योरिटी ने उसे जाने दिया.
वो क्या है कि अगर कोई अपने पालतू जानवर के साथ ट्रैवल करना चाहता है तो उसे देश के एनिमल क्वैरेंटाइन स्टेशन से एनओसी लेना पड़ता है. इसके बाद जानवर चेक-इन-लगेज या फिर एयर कारगो के जरिए ट्रैवल कर सकता है.