भारत बनाम इंग्लैंड वर्ल्ड कप मैच में कप्तान रोहित शर्मा शतक से चूक गए. मगर प्याज़ के दाम शतक मारने की कम्फ़र्टेबल पोज़िशन में आ गए हैं! देश अभी 'टमाटर संकट' से निकला ही था, कि प्याज़ संकट (Onion price hike) दरवाज़े पर खड़ा है. दिल्ली के बाज़ारों में प्याज 90 रुपये प्रति किलो तक बिका है. ग़ाज़ियाबाद, आज़ादपुर मंडी, नोएडा – हर जगह हालात ऐसे ही हैं. झारखंड, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश से भी 'दिवाली में रुलाने जा रहा है प्याज़' टाइप हेडलाइन्स आने लगी हैं.
टमाटर के बाद बढ़ गए प्याज़ के दाम! क्या वजह है? कब तक कम होंगे रेट?
दिल्ली के बाज़ारों में प्याज 90 रुपये प्रति किलो तक बिका है. झारखंड, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में दाम बढ़े हैं.


उपभोक्ता मामलों के विभाग ने आंकड़े जारी किए. गुरुवार, 26 अक्टूबर तक प्याज़ की औसत थोक क़ीमत 3,112.6 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है. यही क़ीमत 1 अक्टूबर को 2,506.62 रुपये प्रति क्विंटल पर थी. सब्ज़ी बेचने वालों का कहना है कि बाज़ार में प्याज़ की कमी है. अगले महीने नवंबर-दिसंबर तक बाज़ार में ख़रीफ़ की कटाई के बाद नया माल आ जाएगा. तब तक क़ीमतें 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने के आसार हैं.
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भारत में लगभग एक लाख हेक्टेयर में ख़रीफ़ प्याज़ की खेती की जाती है. मुख्यतः महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और राजस्थान के कुछ हिस्सों में. जुलाई और अगस्त के बीच बुवाई होती है, अक्टूबर से दिसंबर के बीच काट लिया जाता है. इस फसल को अनियमित मॉनसून, बादल वाले मौसम और लगातार बूंदाबांदी का जोख़िम रहता है.
अब बाज़ार में प्याज़ की आमद कम होने की वजह क्या है? अंग्रेजी अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स ने बढ़ती क़ीमते के कुछ कारण गिनाए हैं. विशेषज्ञों का भी अनुमान है कि हालात स्थिर होने में दो महीने लगेंगे. पिछले दो सालों में किसानों को घाटा हुआ. इसके चलते दक्षिणी राज्यों - कर्नाटक और आंध्र प्रदेश - में खरीफ़ प्याज की बुआई कम हुई. इसके इतर, औसत से कम बारिश होने की वजह से भी प्याज़ के उत्पादन पर असर पड़ा है. कुछ राज्यों में बुआई क्षेत्रों में गिरावट भी आई है. जैसे इस सीज़न में महाराष्ट्र में लगभग 38% की गिरावट देखी गई है.
सरकार क्या कर रही है?दालों और अनाज की ऊंची क़ीमतों के बीच प्याज़ आंटा गीला कर रहा है. दाम-बढ़ोतरी की वजह से लाखों परिवारों पर बोझ पड़ेगा और सरकार की कोशिशों के बाद भी प्याज़ के भाव कम नहीं हो रहे हैं. इसी साल के अगस्त में बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर तक प्याज़ के निर्यात पर 40 प्रतिशत ड्यूटी लगा दी थी. इससे उम्मीद की गई, कि निर्यात सीमित होगा और बाज़ार में प्याज़ की आपूर्ति रहेगी.
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केंद्र ने बफ़र स्टॉक सीमा को 3 लाख टन से बढ़ाकर 5 लाख टन करने का भी फ़ैसला किया था. प्याज़ का खुदरा दाम 57 फ़ीसदी बढ़कर 47 रुपये/किलो हुआ, तो केंद्र ने बफ़र स्टॉक से निकालकर 25 रुपये/किलो के रेट पर प्याज़ बेची. उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने बताया कि जिन राज्यों में दाम बढ़ रहे हैं, वहां थोक और खुदरा दोनों बाज़ारों में 'बफ़र स्टॉक' से प्याज़ दिया जा रहा है.

















