"राजनीतिक नीतियां बनाने के लिए बीजेपी और पीडीपी आज कल बॉलीवुड फिल्में देख रही हैं. उन्होंने ठीक इस तरह से अपना 'तलाक' करने का प्लान बनाया है. शानदार तरीके से फिक्स किया गया मैच, बिलकुल परफेक्ट स्क्रिप्ट. लेकिन न तो अब जनता बेवकूफ है, ना ही हम लोग."उमर का ट्वीट किया वो सीन 1977 में रिलीज़ हुई फिल्म 'किस्सा कुर्सी का' का है. ये भारत की बेस्ट पोलिटिकल फिल्मों में से एक थी. जो अपने रिलीज़ के समय में काफी विवादों में रही थी. इस फिल्म की कहानी गंगू नाम के आदमी की है, जो जनता को मूर्ख बनाकर राष्ट्रपति बन जाता है. मनोहर सिंह, शबाना आज़मी, सुरेखा सिकरी, राज बब्बर ने इस फिल्म में मुख्य किरदार निभाए थे. अप्रैल, 1975 को उन्होंने सेंसर बोर्ड में इसे भेजा. वहां से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तक इसे भेजा गया. वहां से निर्माता को नोटिस भेजा गया और 51 आपत्तियां भीं. फिर इमरजेंसी लग गई और फिल्म बैन कर दी गई. ये फिल्म सीधी इंदिरा गांधी के ऊपर एक तंज था. इन्हीं चक्करों में संजय गांधी ने इस फिल्म के सारे प्रिंट मंगवाकर गुड़गांव की मारुति फैक्ट्री में जला दिए. इसमें फिल्म के निगेटिव भी शामिल थे. बाद में इस मामले की जांच के लिए एक टीम बैठी और इस क्राइम के लिए संजय गांधी को जेल की सजा सुनाई गई. बाद में ये फैसला पलट दिया गया.
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