जिसको ॐ नहीं कहना, वो जाके अपनी भैंस चराए
आयुष मंत्रालय वालों ने कहा, '21 जून को योग के दौरान ॐ का जाप जरूरी है.'
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फोटो - thelallantop
योग करने से मन शांत रहता है. इंसान फिट रहता है. पर जब योग के साथ जुड़ता है फरमान. तो शांति भंग हो सकती है. आशंका जब भी आती है वो यही कहती है. खबर है कि 21 जून को इंटरनेशनल योग दिवस पर योग के दौरान 'ॐ' का जाप जरूरी होगा. आयुष मंत्रालय वालों ने इसको लेकर पूरी तैयारी कर ली है. सरकार की तरफ से अभी इस बारे में कोई बोलने वाला नहीं मिला. पर अनुपम खेर मिल गए. बोले, 'अगर किसी को ॐ नहीं कहना है तो न कहे. कुछ लोग हर बात की राजनीति करना चाहते हैं.' हालांकि सरकार की तरफ से किसी के न मिलने पर एक्टर अनुपम खेर से ये सवाल क्यों पूछा गया. ये समझ से परे है. https://twitter.com/ANI_news/status/732502625971658753 बता दें कि संयुक्त राष्ट्र ने बीते साल 21 जून को इंटरनेशनल योग दिवस मनाने का ऐलान किया. राजपथ पर एक साथ हजारों लोगों ने योगा किया. पीएम नरेंद्र मोदी भी चटाई बिछाकर योग किए. इस बार भी योग दिवस मनाया जाएगा. उसकी तैयारी भी कर ली गई है. योग दिवस पर 45 मिनट का कार्यक्रम होगा. 6 मिनट गर्दन और कंधे से जुड़े आसन होंगे. दो प्रार्थना होंगी. इसके बाद 23 योग आसन किए जाएंगे. क्या है दिक्कत?
कोलकाता के मुस्लिम धर्मगुरु हैं शफीक काजी. बोले, 'ये गलत है. धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है. सत्ता का गलत इस्तेमाल है. आस्था के खिलाफ है. ऐसे फरमान देश के सभी लोगों को आस्था की एक छतरी के नीचे लाने की प्लानिंग है.' बात सही भी है. यानी अगर मेरा कोई मुस्लिम दोस्त योग करना चाहता है. पर वो पक्का वाला आस्तिक है. उसकी मान्यताएं उसे ॐ कहने की इजाजत नहीं देती. तो क्या इसका क्या ये मतलब हुआ कि वो योग भी नहीं कर सकता. क्योंकि सरकार के एक प्रोग्राम में योग के दौरान ॐ कहना जरूरी है. सवाल सीधा सा है. सरकार को समझना होगा. ॐ कहना जबरन नहीं थोपा जा सकता. हां कोई अपनी मर्जी से ॐ कहे, तो उसे कहने का पूरा हक है.
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