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'साला, किडनी निकाल लिहिस!'

उड़िया मजदूर का एक्सीडेंट हुआ. सर्जरी हुई. वापस आया तो मालूम चला एक किडनी कहीं निकाल ली गयी. सब सन्न हैं. जांच चालू है.

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उड़ीसा में नक्सली प्रभावित इलाके में एक गजब काण्ड हुआ है. अगर शिप ऑफ़ थीसियस देखी है तो सब समझ जाओगे. एक आदिवासी मजदूर 2013 में मल्कानगिरी से विजयवाड़ा पहुंचा. बोरवेल खोदने की एक कंपनी में काम करने. इनका नाम था इरमा मदकामी. अप्रैल 2014 में खुदाई करते वक़्त ही उसके साथ एक एक्सीडेंट हो गया. अस्पताल ले जाया गया और मालूम चला कि इनकी बाईपास सर्जरी करनी पड़ेगी. कंपनी ने खर्चा उठाया. सर्जरी हुई. सक्सेसफुल रही. कंपनी ने साथ ही 10,000 रुपिये दिए. इरमा खुशी-खुशी घर वापस आ गये. लेकिन हुआ ये कि इनकी सेहत में कोई खास सुधार नहीं हुआ. परिवार वालों ने एक लोकल डॉक्टर को दिखाया तो जो मालूम चला वो सबको सन्न कर गया. मालूम ये चला कि इरमा की एक किडनी ही गायब थी. किडनी कहां गयी, इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं. लेकिन किडनी कोई ताले की चाभी तो है नहीं जो जेब से गिर जाएगी. साफ़ बात है कि किसी ने चीर-फाड़ करके निकाली होगी. और चीर-फाड़ हुई थी एक्सीडेंट होने के बाद हुई सर्जरी में. मल्कानगिरी के सीडीएमओ ने इस काण्ड की जांच के आदेश डे दिए हैं. इरमा की मेडिकल जांचें अब भी चल रही हैं.

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