बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का एक बयान चर्चा में आ गया. मुख्यमंत्री सदन में जाति आधारित गणना पर सफाई दे रहे थे. इस दौरान विपक्षी दल के नेता हंगामा करने लगे. इसके कारण मुख्यमंत्री बोल नहीं पा रहे थे. फिर नीतीश गुस्से में तेज बोलने लगे. और बोलते-बोलते कुछ ऐसा बोल गए, जिस पर हंगामा शुरू हो गया. उन्होंने मसौढ़ी से राजद विधायक रेखा देवी को फटकार दिया.
'महिला हो, कुछ नहीं जानती हो, चुपचाप सुनो' नीतीश कुमार का RJD विधायक के लिए आपत्तिजनक बयान
Bihar के मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने राजद विधायक Rekha Devi को फटकार दिया. उन्होंने रेखा देवी से कहा, "अरे महिला हो, कुछ जानती नहीं हो, चुपचाप सुनो". इस मामले में RJD विधायक रेखा देवी की प्रतिक्रिया भी आ गई है. राजद ने मुख्यमंत्री पर दलित और महिला विरोधी होने का आरोप लगाया है. क्योंकि रेखा देवी दलित समुदाय से आती हैं.
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रेखा देवी दूसरी बार विधायक बनी हैं. राजद ने इस मामले पर नीतीश कुमार पर दलित और महिला विरोधी होने का आरोप लगाया है. नीतीश कुमार ने सदन में रेखा देवी से कहा, “अरे महिला हो, कुछ जानती नहीं हो. आज महिला होकर बोल रही हो.” CM का इतना बोलना था कि सदन में हंगामा और तेज हो गया. विपक्षी दल के नेताओं ने इसका खूब विरोध किया. इसके बाद नीतीश सफाई देने लगे. उन्होंने कहा,
“बोल रही हो, फालतू बात. इन लोगों ने किसी महिला को आगे बढ़ाया है क्या. 2005 के बाद मैंने महिलाओं को पढ़ाया है. इसलिए कह रहे हैं, चुपचाप सुनो.”
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लल्लनटॉप ने इस बयान पर RJD विधायक रेखा देवी से बात की, रेखा देवी ने बताया कि मुख्यमंत्री का इशारा उन्हीं की ओर था. रेखा देवी ने कहा-
“मुख्यमंत्री एक तरफ महिला उत्थान की बात करते हैं और वहीं दूसरी तरफ इस तरह का बयान देते हैं. हम लोग समझते हैं कि वो बुजुर्ग हो गए हैं. अब और क्या ही कह सकते हैं.”
राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने लल्लनटॉप से कहा,
‘लाचार’ दिखे Nitish Kumar“रेखा देवी एक महिला और दलित विधायक हैं. मुख्यमंत्री का ये बयान महिला विरोधी तो है ही, साथ ही दलित विरोधी भी है. रेखा देवी दूसरी बार विधायक बनीं हैं. CM के बयान में कोई बुनियाद नहीं है. हम मांग करते हैं कि वो माफी मांगें. उन्होंने ये बयान विधानसभा में दिया है तो माफी भी विधानसभा में ही मांगें. उन्होंने रुपौली उपचुनाव के दौरान भी राजद उम्मीदवार बीमा भारती के लिए ‘अपशब्दों’ का इस्तेमाल किया था.”
सदन में विपक्ष की भूमिका निभा रही INDIA गठबंधन मजबूत स्थिति में है. राज्य की कुल 243 विधानसभा सीटों में से 106 सीटेंं INDIA गठबंधन के पास हैं. राजद बिहार की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है. उनके पास 72 विधानसभा सीटेंं हैं. वहीं 133 सीटों के साथ राज्य में NDA की सरकार है. नीतीश कुमार की पार्टी JDU के पास 47 विधानसभा सीटें हैं. ऐसे में सदन में जब नीतीश के इस बयान पर हंगामा हुआ तो उनका बोलना मुश्किल हो गया. कुछ ही देर में वो बैकफुट पर दिखे और सफाई देते हुए कहने लगे,
“अरे ऐसे ही बोल रहे हैं. अरे क्या हुआ. सुनोगे नहीं. हम तो सुनाएंगे (जाति गणना के बारे में). और अगर आप नहीं सुनिएगा तो ये आपकी गलती है. आप समझ लीजिए. ये हम चाह रहे थे कि लोग समझते और एक-एक चीज को हमने लागू कर दिया. जो-जो हमने तय किया था.”
INDIA गठबंधन के नेता आरक्षण को नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे थे. इसपर नीतीश का कहना था कि आरक्षण को लेकर सारे काम ‘जाति आधारित गणना’ के आधार पर किए जा चुके हैं. वो बार-बार इस बात को दोहरा रहे थे कि जब उन्होंने ‘जाति सर्वे’ की बात की थी, तब विपक्षी दल उनके साथ थे.
Nitish पहले भी दे चुके हैं विवादित बयाननवंबर 2023 में भी नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए विवादित बयान दिया था. नीतीश तब विधानसभा में जनसंख्य नियंत्रण पर बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने महिला शिक्षा और सेक्स के बारे में बोलते हुए जिस भाषा का इस्तेमाल किया, उसे विपक्ष ने अश्लील और अपमानजनक बताया था. उन्होंने कहा था,
चर्चा में क्यों हैं Nitish Kumar?“जो पुरुष है, ऊ तऽ रोज रात में जे सदिया (शादी) होता है, उसके साथ करता है न. तो उसी में और पैदा हो जाता है और लड़की पढ़ लेती है. ई हमको मालूम था. ये करेगा ठीक है…”
दल बदलने के आरोपों के कारण देश भर में प्रचलित नीतीश, फिलहाल केंद्रीय बजट में बिहार को मिले खास फंड के कारण चर्चा में हैं. इससे पहले उन्होंने बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग की थी. हाल के दिनों में उनकी पार्टी के नेताओं ने इसके लिए माहौल तैयार करने की कोशिश की थी. लेकिन केंद्र सरकार ने इससे इनकार कर दिया. उन्होंने संसद में कहा कि बिहार ‘विशेष दर्जे’ के लिए तय मानकों पर फिट नहीं बैठता. इसके बाद जब बजट का एलान हुआ तो बिहार को खाल फंड्स मिले. कुछ राज्यों के विपक्षी दलों के नेताओं ने आरोप लगाया कि बिहार को इस बजट में विशेष तरजीह दी गई है. क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश, प्रधानमंत्री मोदी की सरकार बनाए रखने के लिए जरूरी हैं.
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