घर वालों के लिए बच्चा हनुमान था, लेकिन डॉक्टर ने इसकी पूंछ काट दी
पूंछ कटवाना नहीं चाहते थे. बच्चे की पूंछ स्कूल में बेंच से टकराती थी.
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नागपुर के डॉक्टर्स ने 18 सेंटीमीटर की पूंछ निकाली है. Photo- ANI
इंसान पहले बंदर थे. हिस्ट्री में हमने-तुमने सबने बहुत पढ़ा है. बस पढ़ा ही है. माना नहीं. लेकिन इस खबर को पढ़कर मान जाओगे कि वाकई हमारे पूर्वज बानर थे. नागपुर में नसों के डॉक्टर यानी की न्यूरो सर्जन्स की टीम ने एक बच्चे के पिछवाड़े से 18 सेंटीमीटर की पूंछ निकाली है. बच्चा 18 साल का है. उसके पिछवाड़े में पूंछ जन्मजात थी. ये बात बच्चे के घरवालों को भी पता थी, लेकिन उन लोगों ने फिर भी डॉक्टर को नहीं दिखाया. क्योंकि उन्हें डर था कि इससे समाज में उनकी बदनामी होगी. और कुछ तो अंधविश्वास था. माने वो बालक नहीं पूंछ होने से हनुमान हो गया हो. बच्चे की लाइफ नॉर्मल चल रही थी. पर जैसे-जैसे उसकी उम्र बढ़ती गई, पूंछ भी उसी हिसाब से बढ़ती चली गई. आज वो 18 साल का है. और पूंछ भी 18 सेंटीमीटर की थी. जिसे सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल के न्यूरो सर्जन्स ने काट फेंका. पहले बच्चे को पूंछ से कोई तकलीफ नहीं थी. फिर जैसे-जैसे पूंछ की लंबाई बढ़ती गई, उसे सोने-बैठने में दिक्कतें आने लगी. स्कूल जाता तो पूंछ बेंच में टकराती. इससे बच्चा परेशान हो गया था. दर्द भी होता था इससे. उसने फिर अपने पेरेंट्स को बताया. हफ्ते पहले वो फौरन बच्चे को लेकर सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल पहुंचे. जहां डॉक्टर्स ने दो दिन पहले पूंछ का झंझाल निकाल फेंका. न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट के हेड डॉक्टर प्रमोद गिरि ने बताया, 'सर्जरी कोई जरूरी नहीं थी. लेकिन पूंछ दबने के कारण बच्चे के स्पाइनल कोर्ड से जुड़ गई थी, इसलिए सर्जरी करनी पड़ी. इस तरह के मामले बहुत रेयर हैं. बच्चे की पूंछ ने तो लगभग-लगभग रिकॉर्ड ही बना लिया है.'
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