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इजरायल ने शहबाज शरीफ को झूठा बताया? सीजफायर की एक शर्त पर कहा- 'ये बात नहीं हुई'

Israel backs Iran Ceasefire Plan: सीजफायर पर इजरायल ने भी सहमति जताई है, लेकिन उसने लेबनान को लेकर रखी गई एक शर्त मानने से इंकार कर दिया है. जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, जो इस मामले में मध्यस्थता कर रहे हैं, ने इस शर्त पर भी सहमति बनने की बात कही थी.

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बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप के दावे को झुटला दिया. (फोटो- इंडिया टुडे)

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए सीजफायर पर सहमति बन गई है. ईरान और अमेरिका ने पोस्ट कर सीजफायर के बारे में बताया. अब इजरायल ने भी इस युद्धविराम को मान लिया है. लेकिन उसकी एक अहम शर्त है. उसने साफ कर दिया है कि ये सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होगा. जबकि इस मामले में प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने ये घोषणा की थी कि लेबनान पर हमले ना करने को लेकर भी ईरान की शर्त मान ली गई है और लेबनान पर भी ये सीजफायर लागू होगा.

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डील में लेबनान की एंट्री क्यों हुई? पहले ये समझ लेते हैं. लेबनान में हिज्बुल्लाह एक शिया इस्लामी राजनीतिक और शक्तिशाली संगठन है. जंग के दौरान इजरायल इस संगठन को निशाना बना रहा था. ईरान हिज्बुल्लाह का समर्थन करता है. इसे फंड करता है. इसलिए ईरान ने अपने पीस प्लान में एक शर्त रखी थी. शर्त ये कि इजरायल, हिज्बुल्लाह पर हमले नहीं करेगा. इजरायल ने इसी शर्त को नकारा है. 

इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO ने अपने बयान में कहा, 

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‘हम राष्ट्रपति ट्रंप के उस फैसले का समर्थन करते हैं जिसमें ईरान पर हमले दो हफ़्तों के लिए रोकने की बात कही गई है. बशर्ते ईरान तुरंत होर्मुज स्ट्रेट खोले और अमेरिका, इजरायल और अन्य देशों पर हमले बंद करे.’

आगे कहा कि इजराइल अमेरिका की उस कोशिश का समर्थन करता है जिसमें यह सुनिश्चित किया गया कि ईरान अब परमाणु हथियार, मिसाइल या आतंक का खतरा न बने. पीएमओ ऑफिस की पोस्ट के अंत में ये साफ क‍िया गया कि दो हफ्ते का सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होता.

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शहबाज शरीफ ने क्या कहा था?

इजरायल के इस बयान को सीजफायर में फूट के तौर पर देखा जा रहा है. सीजफायर डील में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ ने सीजफायर को लेकर कहा था कि इस सीजफायर में लेबनान भी शामिल है.

ईरान की दस शर्तों में से एक शर्त लेबनान वाली भी है 
  1. ईरान पर आगे कभी हमला नहीं होगा, ये सुनिश्चित किया जाए.
  2. स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल जारी रहेगा.
  3. ईरान यूरेनियम एनरिच कर सकता है, इस बात को एक्सेप्ट किया जाए.
  4. देश पर लगे सभी प्राइमरी और सेकेंडरी सैंक्शन हटाए जाएं.
  5. ईरान स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज खोलने के लिए तैयार है. लेकिन इस रास्ते से गुजरने वाले हर जहाज को 2 मिलियन डॉलर की फीस देनी होगी. 
  6. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN security council) में ईरान के खिलाफ प्रस्ताव को खारिज किया जाए.
  7. IAEA के बोर्ड ऑफ गवर्नर के सभी प्रस्ताव खारिज हों.
  8. जंग में ईरान का जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई की जाए.
  9. अमेरिकी सेना को वापस बुलाया जाए.
  10. केवल सीजफायर तक नहीं, हमेशा के लिए जंग ख़त्म होनी चाहिए. लेबनान में भी इज़रायली हमले रोके जाएं.

इस डील में अमेरिका की ओर से भी 15 शर्तें रखी गई हैं. जिसमें ईरान से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने के लिए कहा गया है. साथ ही इलाके में सभी हमले बंद करने को कहा गया है. अब 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच बात होगी. देखना होगा कि इस 10 पॉइंट वाले पीस प्लान पर कितनी सहमति बनती है. 

वीडियो: ट्रंप का सीजफायर प्लान देखने के बाद नेतन्याहू ने क्या आदेश दिया?

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