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पाक पीएम को नसीरुद्दीन ने जो जवाब दिया, वो अब भारत पर चुप ही रहेंगे

भारत को ज्ञान देने चले थे इमरान खान.

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फोटो - thelallantop
नसीरुद्दीन शाह आजकल खूब चर्चा में हैं. अपने बयानों को लेकर. पहले विराट कोहली पर टिप्पणी और उसके बाद बुलंदशहर मसले पर बयान. हालांकि ज्यादा चर्चा और विवादों में उनका दूसरा बयान है. जिसमें उन्होंने अपने बच्चों को लेकर फिक्र जताई थी. हमारे देश में वैसे भी सलाह देना लोग अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं, इसलिए कुछ रायबहादुर उन्हें पाकिस्तान जाने की सलाह भी देने लगे. इस पर पाकिस्तान भला कैसे चुप रहता. लगे हाथ उसने भी भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जता दी है.
इमरान खान अपने देश के अल्पसंख्यकों की स्थिति सुधारें, अच्छी बात है. हमारी शुभकामनाएं हैं. लेकिन इसमें मोदी सरकार को सिखाने की बात कहां से आ गई?
इमरान खान अपने देश के अल्पसंख्यकों की स्थिति सुधारें, अच्छी बात है. हमारी शुभकामनाएं हैं. लेकिन इसमें मोदी सरकार को सिखाने की बात कहां से आ गई?

और सामने आए हैं खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान. बोले हैं कि हम मोदी सरकार को सिखाएंगे कि अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं. भारत में लोग कह रहे हैं कि अल्पसंख्यकों के साथ समान नागरिकों की तरह व्यवहार नहीं हो रहा है. इमरान खान का ये कहना था कि नसीरुद्दीन शाह का एक और बयान आया है. उन्होंने इमरान की हमदर्दी को वापस करते हुए कहा है कि उन्हें पहले अपना देश संभालना चाहिए.
नसीरूद्दीन शाह ने कभी नहीं कहा कि अल्पसंख्यकों के साथ दोयम दर्जे के व्यवहार होता है. मतलब इमरान खान मनगढ़ंत हवाबाजी कर रहे हैं.
नसीरुद्दीन शाह ने कभी नहीं कहा कि अल्पसंख्यकों के साथ दोयम दर्जे के व्यवहार होता है. मतलब साफ है कि इमरान खान मनगढ़ंत हवाबाजी कर रहे हैं.

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए नसीर ने कहा कि खान को उन मुद्दों पर बात करनी चाहिए जो उनके देश में चल रही हैं. न कि उन पर जिनसे उनका कोई वास्ता नहीं है. हम 70 साल से लोकतंत्र हैं और हमें पता है कि हमें अपना ध्यान कैसे रखना है. इमरान खान ने इस बयान के जरिए यह दर्शाने की कोशिश की थी कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार होता है. लेकिन नसीर ने उनके मसूंबों पर पानी फेर दिया. पाकिस्तान के नए नवेले कप्तान शायद यह भूल गए कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और देश के संविधान ने हर नागरिक को समान अधिकार दे रखा है. दोयम दर्जे की नागरिकता जैसी कोई चीज ही नहीं है. रही सही कसर नसीर ने उनको जवाब देकर पूरी कर दी है.
इससे पहले नसीरुद्दीन ने एक इंटरव्यू में बुलंदशहर हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा था कि एक पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या से ज्यादा गाय को महत्व दिया जा रहा है. मुझे फिक्र होती है कि कल को यदि कोई मेरे बच्चों को घेर लेगा और पूछेगा कि तुम हिंदू हो या मुसलमान तो वो क्या जवाब देंगे.
जिसके बाद कई संगठनों ने उनकी कड़ी आलोचना भी की थी.


वीडियो देखें: वो 6 फिल्में जो नसीरुद्दीन के दीवानों को ज़रूर देखना चाहिए. 

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