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ट्रंप के टैरिफ वॉर से मिलकर निपटेंगे मोदी-पुतिन और जिनपिंग? SCO में होगी तीनों नेताओं की मुलाकात

Donald Trump को भारत-रूस तेल व्यापार से आपत्ति है. उनकी सरकार इस बात से भी नाराज है कि भारत और चीन की नजदीकियां बढ़ रही हैं. इन सबके बीच PM Narendra Modi चीन और रूस के शीर्ष नेताओं के साथ मुलाकात करने वाले हैं.

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जापान के लिए रवाना होते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (तस्वीर: PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो देशों की यात्रा पर हैं. पीएम जापान (Narendra Modi in Japan) पहुंच गए हैं, इसके बाद वो चीन जाएंगे. जहां SCO सम्मेलन के दौरान मोदी-पुतिन और जिनपिंग की मुलाकात होगी. पीएम मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ये मुलाकात अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के बीच हो रही है. लिहाजा इस यात्रा पर दुनियाभर की निगाहें टिकी हुई हैं. 

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जापान में दो दिवसीय यात्रा के बाद प्रधानमंत्री चीन के लिए रवाना होंगे. सात सालों में उनकी ये पहली चीन यात्रा होगी. 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन की राजधानी बीजिंग के पास तियानजिन में, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन का आयोजन होना है. इसी दौरान पीएम मोदी, शी और पुतिन से मिलेंगे. 31 अगस्त को शी के साथ उनकी बैठक की संभावना है.

इस यात्रा पर निकलने से पहले पीएम ऑफिस की ओर से जारी बयान में प्रधानमंत्री ने कहा,

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साझा चुनौतियों को सुलझाने और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने के लिए, भारत SCO सदस्यों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है. मैं शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग, राष्ट्रपति पुतिन और अन्य नेताओं से मिलने के लिए भी उत्सुक हूं.

रूस से तेल खरीदने के कारण अमेरिका से तनाव

चीन और रूस के शीर्ष नेताओं से पीएम मोदी की ये मुलाकात ऐसे वक्त में होने वाली है, जब अमेरिका के साथ भारत के व्यापार संबंध लगातार खराब हो रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का आरोप है कि रूस से तेल खरीदकर, भारत उसे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में वित्तपोषित कर रहा है. इसी कारण से ट्रंप सरकार ने भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया है. जो पहले से लगे 25 प्रतिशत टैरिफ में जुड़कर कुल 50 प्रतिशत हो गया है.

हालांकि, भारत वो देश नहीं है, जो रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदता है. सबसे ज्यादा तेल खरीदने वालों में चीन और यूरोप हैं. इसके बावजूद ट्रंप सरकार ने भारत को निशाना बनाया है. इसका एक कारण ये भी बताया जा रहा है कि ट्रंप के दिए कई डेडलाइन के बावजूद भी भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका.

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भारत की चीन और रूस से करीबी पर भी नाराजगी

लेकिन बात इतनी भर नहीं है, भारत का रूस और चीन के करीब जाना भी अमेरिका को रास नहीं आ रहा. ट्रंप के शीर्ष सहयोगी और वाइट हाउस में सलाहकार पीटर नवारो ने ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में कहा,

अगर भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर दे और युद्ध खत्म करने में मदद करे, तो उसे 25 प्रतिशत की छूट मिल सकती है. लोकतंत्रों का साथ देने के बजाय, आप सत्तावादियों के साथ मिल रहे हैं. आप दशकों से चीन के साथ एक ‘शांत युद्ध’ में हैं. चीन ने अक्साई चिन और आपके पूरे क्षेत्र पर आक्रमण किया. वो आपके मित्र नहीं हैं. 

इससे पहले पीएम मोदी ने जून 2018 में चीन की यात्रा की थी. वो SCO सम्मेलन के लिए किगदाओ पहुंचे थे.

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