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'ऊंची जाति' के लोगों ने पत्नी को नहीं भरने दिया पानी, पति ने 40 दिन में खोद डाला कुआं

रोज 6 घंटे खुदाई करते थे बापुराव.

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फोटो - thelallantop
'जब तक तोड़ेगा नहीं, तब तक छोड़ेगा नहीं.' मांझी फिल्म में ये डायलॉग सुना था. पूरी फिल्म देखी, कहानी जानी तो लगा क्या कमाल बंदा था मांझी. पहाड़ काट दिया बीवी के लिए. फिर एक खबर संडे सुबह पता चली. एक बंदे ने अपनी वाइफ के लिए कुआं खोद डाला. वजह ज्यादा दिलचस्प है. बापुराव ताजणे की वाइफ ने जब गांव के एक कुएं से पानी भरने की कोशिश की, तो 'ऊंची जाति' के लोगों ने मना कर दिया. ये बात जब बापुराव ताजणे को पता चली. तो वो दुखी होने की बजाय मुंहतोड़ जवाब देने की कसम खा बैठा. जवाब देने के लिए वो तरीका चुना, जिसे अब लोग सालों याद रखेंगे. बापुराव ने महज 40 दिन में कुआं खोद डाला. खुशखबरी है कि अब उस कुएं से पानी निकल रहा है. उस रोज बापुराव की पत्नी को पानी न भरने देने वालों की आंखों से भी पानी निकल ही रहा होगा. द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, बापुराव अपने फैमिली के साथ कलांबेश्वर गांव में रहते हैं. बापुराव के खोदे कुएं का इस्तेमाल गांव के दलित कर रहे हैं. बता दें कि बापुराव दिहाड़ी मजदूर हैं. रोज 8 घंटे की मजदूरी करते हैं. कुएं खोदने का वक्त इस मजदूरी से अलग है. बताते हैं कि 40 दिन तक बापुराव ने रोज 6 घंटे कुएं की खुदाई की.
ये उस दौर की बात है. जब महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्सों में सूखा पड़ा हुआ है. बापुराव जब कुएं की खुदाई करते तो लोग मजाक उड़ाते. ठीक वैसे ही जैसे मांझी फिल्म में लोगों को मजाक उड़ाते दिखाया गया था.
बापुराव ताजणे ने कहा,
'मैं  'ऊंची जाति' के उन लोगों का अब नाम नहीं बता सकता. मैं गांव में खून राबा, लड़ाई झगड़ा नहीं चाहता. लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि उन लोगों ने ऐसा इसलिए किया. क्योंकि हम गरीब दलित हैं. उस दिन मैं बहुत दुखी था. जिस दिन ये घटना हुई थी. पत्नी के साथ हुई इस हरकत के साथ मैं कुआं खोदने के लिए औजार ले आया. और खुदाई चालू कर दी. मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मुझे इस काम में सफलता मिली.'

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