खुदाई में मिला रहस्यमयी चेहरा किसका है?
पुरातत्व विभाग को खुदाई में एक पत्थर मिला जिसपर कोई रहस्यमयी चेहरा बना हुआ है. इस आकृति की दाढ़ी दिख रही है और एक लंबी टोपी भी पहनी हुई है. विशेषज्ञों के मुताबिक उस वक़्त के लोगों का पैराहन ऐसा नहीं था. ये किसी विदेशी की शक्ल लगती है. चूंकि ये पत्थर मंदिर से मिला है इसलिए सभी इस बात से हैरान हैं कि पुराने वक़्त में किसी विदेशी को धार्मिक गतिविधियों में भी शामिल किया जाता था. पत्थर पर बनी आकृति की खोपड़ी और टोपी भारतीय पोशाक परंपरा से मेल नहीं खाती. कपड़े और चेहरे की बनावट कुछ हद तक पश्चिम एशिया में पाए जाने वाले चेहरों से ज़रूर मिलती है. ये कुछ-कुछ पश्चिम एशिया या अरेबियन पर्शियन रीजन से भी मिलती है. इसका मतलब ये निकाला जा रहा है कि इस काल में कोई विदेशी नागरिक भारत आया था. इसी घटना के कारण अब पुरातत्वविद अतिउत्साहित नज़र आ रहे हैं.

बाईं ओर की मूर्ति पर 'विदेशी' चेहरा बना हुआ है वहीं दूसरी ओर विष्णु की खोजी हुई मूर्ति है.
जहां से ये पत्थर मिला है वो छठी शताब्दी का एक मंदिर है. विष्णु मंदिर की खुदाई पूरी कर ली गई है और वहां से जो मूर्तियां मिली हैं वैसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं. भगवान विष्णु की एक मूर्ति भी मिली.लेकिन ये आम मूर्ति की तरह नहीं थी. मूर्ति की कमर से एक डमरू बंधा है. और उसे बाएं हाथ से कुछ इस तरह पकड़ा गया है जैसे वो इसे बजा रहे हों. विष्णु की दूसरी मूर्तियों की तरह इसमें चक्र और शंख भी हैं. विष्णु की डमरू के साथ बहुत रेयर है. ये मूर्तियां कलचुरी काल, गुप्तकाल से लेकर दूसरी सदी तक की बताई जा रही हैं. खोजे गए मंदिरों में गर्भगृह और अर्धमंडप भी मिला है. जिनमें हथियार मिले हैं. ऐसा अनुमान है कि उस समय लोग मंदिरों में हथियारों की पूजा करते थे.
ब्राह्मी लिखा पत्थर
इसके अलावा एक और पत्थर भी मिला है जिसपर ब्राह्मी में 'र' और 'ल' लिखा हुआ है. एक अंदाजे के मुताबिक ये पहली या दूसरी सदी का है. ज़मीन से 25 सेंटीमीटर नीचे मिले इस पत्थर से उस वक़्त के शहरीकरण का अनुमान लगाया जा रहा है.

ब्राह्मी लिपि में लिखा हुआ पत्थर.
इस खुदाई का नेतृत्व करने वाली डॉ. सामंत की मानें तो ये एरिया करीब 1 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और यहां ऐसे ही 4 और मंदिरों के दबे होने का पता लगाया जा चुका है. इसके अलावा कुछ मठ भी खोजे जा चुके हैं. डॉ. सामंत के मुताबिक उन्हें मध्यकालीन युग के कुछ मंदिर और मठ ज़रूर मिले हैं लेकिन इस काल के किसी रिहायशी इलाके की पहचान नहीं हो पाई थी. भारत में ऐसी बहुत कम जगहें मिलती हैं.

खुदाई के दौरान इस जगह से तीन गुफाएं भी मिली हैं. खुदाई से निकली ईंटों पर लिखी गई ब्राह्मी लिपि पहली सदी की है. देवनागरी सहित कई एशियाई लिपियों का विकास ब्राह्मी से ही हुआ है. एएसआई का मानना है कि इलाके में नहर बनाए जाने की वजह से खुदाई करने योग्य काफी इलाका ख़राब हो चुका है. कार्य प्रगति पर है. जल्द ही कुछ और ऐतिहासिक पत्थर खोजे जाने बाकी हैं.
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