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17 मुस्लिमों का दल अमित शाह से मिला, रामनवमी हिंसा, लिंचिंग जैसे मुद्दों पर क्या बात हुई?

मुस्लिम आरक्षण, लिंचिंग, हेट स्पीच...लौटकर क्या बोले उलेमा?

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17 सदस्यीय मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री से मुलाकात की ( फोटो- ट्विटर/इंडिया टुडे)

मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल (Muslim Delegation) ने 4 अप्रैल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इस दौरान प्रतिनिधिंडल ने अमित शाह (Amit Shah) से कई मुद्दों पर बात की. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में हाल ही में रामनवमी के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं (Ram Navami Violence) पर भी बात हुई.

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इंडिया टुडे से जुड़े आशुतोष मिश्रा की रिपोर्ट के मुताबिक अमित शाह से इस मुलाकात के दौरान कर्नाटक में मुस्लिम आरक्षण की वापस लेने पर भी चर्चा हुई. मौलाना नियाज़ अहमद फारूकी ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा,

“अमित शाह ने मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल से बीजेपी के नेता के तौर पर नहीं, बल्कि केंद्रीय गृह मंत्री के तौर पर मुलाकात की.”

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17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी, सचिव नियाज फारूकी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारूकी और प्रोफेसर अख्तरुल वासे कर रहे थे. प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री से मुलाकात में 14 मुद्दों को उठाया. मुलाकात के बाद नियाज फारूकी ने बताया कि अमित शाह ने उनकी सभी शिकायतों को सुना. उन्होंने कहा,

“हमने रामनवमी हिंसा, इस्लामोफोबिया के बढ़ते खतरे और यहां तक कि कर्नाटक में मुस्लिम आरक्षण को खत्म करने सहित कई मुद्दे उठाए थे.”

रिपोर्ट के मुताबिक, मुलाकात में कर्नाटक के मुस्लिम आरक्षण मुद्दे को लेकर अमित शाह ने अपना पक्ष सामने रखा. अमित शाह ने कहा कि इस मुद्दे पर भ्रम फैलाया जा रहा है क्योंकि इससे कर्नाटक में पसमांदा मुसलमानों को आरक्षण मिलता रहेगा. उन्होंने बताया कि इस मामले में कानून मंत्रालय जल्द ही स्पष्टीकरण भी देगा.

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गृह मंत्री से बैठक के दौरान मुस्लिम नेताओं ने बिहार के नालंदा में एक मदरसे को आग लगाने वाली घटना का भी ज़िक्र किया. इसके साथ ही राजस्थान के भरतपुर निवासी जुनैद और नासिर की हत्या पर भी चर्चा हुई. नियाज फारूकी ने बताया कि उन्होंने बीजेपी नेताओं द्वारा नफरती भाषण देने का मुद्दा भी उठाया. इस पर अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा,

“हर तरह के लोग होते हैं, इसलिए सभी को एक ही चश्मे से देखना सही नहीं है. सरकार इसमें शामिल नहीं थी.”

फारूकी ने ये भी कहा कि बैठक के दौरान उन्होंने किसी नेता को निशाना नहीं बनाया. बैठक का ये उद्देश्य नहीं था. उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य सहयोग स्थापित करना और देश के माहौल को बदलना है.

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