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पुलिस ने प्लेटफॉर्म से जाने को कहा तो बोला, 'स्टेशन तुम्हारे बाप का है', कोर्ट ने लंबा भेज दिया

गश्त कर रही पुलिस ने स्टेशन पर सो रहे रामेश्वर राठौर को जगाकर वहां से जाने के लिए कहा था, वो भड़क गया.

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(सांकेतिक तस्वीर: PTI)

मुंबई सेशन्स कोर्ट ने रेलवे प्लेटफॉर्म पर सोने के दौरान पुलिस के साथ भिड़ने के मामले में एक व्यक्ति को 1 साल 7 महीने की सजा सुनाई है. मामला ये है कि घटना वाले दिन रामेश्वर राठौर प्लेटफॉर्म पर सो रहा था, तब गश्त कर रही पुलिस ने उसे जगा कर स्टेशन से जाने को कहा. इसी बात पर रामेश्वर राठौर पुलिस से भिड़ गया और कहने लगा कि वो कहीं नहीं जाएगा. उस पर पुलिस के साथ अभद्रता करने और पुलिस की ड्यूटी में बाधा डालने का आरोप लगा था.

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इंडिया टुडे की विद्या की रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला नवंबर, 2020 का है. छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पर पुलिसकर्मी गश्त कर रहे थे. उस दौरान उन्होंने देखा कि प्लेटफॉर्म 15 पर एक व्यक्ति सो रहा है. पुलिस वालों ने उसे जगाने की कोशिश की और स्टेशन से जाने को कहा. हालांकि वह व्यक्ति सुनने के मूड में नहीं था. उल्टा वह पुलिस पर चिल्लाया और उन पर झपट पड़ा. उसने पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र भाषा में बात की. रिपोर्ट के मुताबिक व्यक्ति ने कहा,  

क्या यह स्टेशन तुम्हारे बाप का है? मैं यहीं सोऊंगा, यहां से नहीं जाऊंगा, जो चाहो करो.

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रिपोर्ट के मुताबिक रामेश्वर राठौर ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक बल का प्रयोग किया था, इसलिए उसे पुलिस स्टेशन लाया गया. उसके खिलाफ पुलिस के काम में बाधा डालने को लेकर एफआईआर दर्ज की गई और गिरफ्तार कर लिया गया.

आरोपी का अपराध सिद्ध करने के लिए पांच गवाहों को पेश किया गया था. इस मामले में जज आरके क्षीरसागर ने कहा,

ऐसा लगता है कि आरोपी और प्रॉसिक्यूशन के गवाहों के बीच कोई दुश्मनी नहीं है. इसलिए झूठे आरोप का सवाल ही नहीं उठता. गवाहों ने साफ तौर पर बयान दिया कि आरोपी ने आपराधिक बल का प्रयोग करके बाधा डाली. उसने एक पुलिसकर्मी को गाली दी और धक्का भी दिया.

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वहीं रामेश्वर राठौर ने सीसीटीवी फुटेज के सबूत का हिस्सा नहीं होने होने पर आपत्ति जताई और कहा कि पुलिसकर्मी उस समय ड्यूटी पर नहीं थे. हालांकि इस पर जज ने कहा कि यह माना जा सकता है पुलिसकर्मी 24 घंटे ड्यूटी पर रहते हैं.

प्रॉसिक्यूशन का कहना था कि अपराध पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ किया गया और इसलिए आरोपी को अधिकतम सजा दी जानी चाहिए. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक रामेश्वर राठौर नाम के इस शख्स को कोर्ट ने उतनी अवधि की सजा सुनाई है, जो वो पहले ही हिरासत में काट चुका है.

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