
हादसे वाले ब्रिज को पूरी तरह से तोड़ दिया गया
रेलवे का नाम हटाने से पहले पुलिस ने रेलवे और बीएमसी के अधिकारियों से लंबी पूछताछ की. पुलिस ने अलग टीम बनाई जिसने अधिकारियों से पूछताछ की. जिस कंपनी ने पुल का ऑडिट किया पुलिस ने उससे भी पूछताछ की. क्योंकि कुछ समय पहले जब अंधेरी में पुल हादसा हुआ था तब इस पुल का भी ऑडिट हुआ. 1981 में बने इस पुल की ज़िम्मेदारी बीएमसी के पास थी. रिपोर्ट के मुताबिक ऑडिट के बाद बीएमसी को कुछ सुधार करने के लिए कहा गया था. लेकिन उसे ठीक नहीं किया गया. यहां तक कि सुधार नहीं होने पर ब्रिज को रोकने की भी बात की गई थी. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं किया गया.
दूसरी तरफ बीएमसी के कमिश्नर अजय मेहता ने विजिलेंस विभाग से 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है. साथ ही उन्होंने ब्रिज के स्ट्रक्चरल ऑडिट और दुर्घटना के लिए ज़िम्मेदार अपने कर्मचारियों की पहचान करने के लिए भी कहा है.






















