अटल-आडवाणी के लिए उनकी भाषा, भाव-भंगिमा बड़ी तंज वाली थी. उन्होंने कहा कि अटल जी जाने वाले हैं, उनके जाने के टाइम में एक घंटा बाकी है. फिर उन्होंने ये कविता सुनाई, ''अटल जी आपका नजदीक आया है जाने का वक्त क्योंकि NDA के कुछ लोग बन रहे हमारे भक्त अब हमारा एक ही लक्ष्य है NDA को सत्ता से हटाना हमारा दूसरा लक्ष्य है सोनिया गांधीजी चंद्रशेखरजी मुलायमजी लालूजी (सारे विपक्षी नेताओं के नाम लेते हैं) को सत्ता में बिठाना अटलजी की सरकार बहुत है चालू अध्यक्ष महोदय ये सरकार के विरुद्ध मैं क्या क्या बोलूं अटलजी आपके पास होगा डीएमके का बालू मगर हमारे पास है मजबूत आरजेडी का लालू आपके राज में गरीबों को नहीं मिल रहा है आलू ये सरकार के खिलाफ बोलना मैं कैसे टालूं'' और इन दो लाइनों ने तो सदन में कहर बरपा दिया. ''देश को बचाने की जिम्मेदारी मैं किस पर डालूं आडवाणी तो आप से भी हैं बहुत चालू''इतना बोलकर अठावले आंख मारते हैं और लोकसभा ठहाकों से गूंज उठती है. अगल-बगल बैठे अटल-आडवाणी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाते. उनके पीछे सुषमा स्वराज मुस्कुराती हुई दिखती हैं. अरुण जेटली ठहाके लगाते दिखते हैं. https://youtu.be/wpX0dKt3qfg?t=22s ट्विटर पर मौज लेने वालों ने लिखा है कि अठावले को मंत्री बनाने की असली वजह इसी वीडियो में छिपी है. :)
'अटल जी, आडवाणी तो हैं आप से भी ज्यादा चालू'
मोदी के नए मंत्री की पुरानी कविता वायरल. रामदास अठावले तब सोनिया गांधी को सत्ता में बैठाने का सपना देखते थे.
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रामदास अठावले.
मोदी मंत्री परिषद बड़ी हो गई है और कुछ नाम सोशल मीडिया पर चढ़ गए हैं. सबसे ज्यादा बात किसकी हो रही है, सब जानते हैं. डिमोट करके कपड़ा मंत्री बनाई गईं स्मृति ईरानी की. उनके अलावा अनुप्रिया पटेल, प्रकाश जावड़ेकर, एमजे अकबर और रामदास अठावले पर भी अलग-अलग वजहों से चर्चा चल रही है. ट्विटर तो है ही खखोरू लोगों की जगह. लोग रामदाव अठावले का एक पुराना वीडियो खोज लाए हैं. 2003 का वीडियो है, जिसमें वह संसद में एक फनी कविता सुनाकर अटल सरकार की मौज ले रहे हैं. अठावले महाराष्ट्र के कद्दावर दलित नेता हैं. सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बनाए गए हैं. वो बीजेपी से नहीं हैं. उनकी पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) एनडीए गठबंधन का हिस्सा है. ये पुराना वीडियो तब का है, जब 2003 में अटल सरकार को गिराने के लिए सोनिया गांधी ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था. उस पर चर्चा चल रही थी, वोटिंग बाकी थी. तभी आरपीआई के रामदास अठावले अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में बोलने के लिए खड़े हुए. तब वे कांग्रेस के साथ और बीजेपी के खिलाफ खड़े थे. उन्होंने जो कविता सुनाई, उस पर सदन में खूब ठहाके लगे. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी चुपचाप गंभीर मुद्रा में अपनी सीट पर बैठे सुनते रहे.
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