बाद में अदालत में इस एफआईआर को रद्द करने की मांग के लिए एक याचिका दायर की गई थी. इसी याचिका की सुनवाई करते हुए अदालत ने ये फैसला दिया है. जस्टिस एमके गुप्ता और जस्टिस वीरेंद्र कुमार की बेंच ने इसे पारित किया है.

'मिर्ज़ापुर 2' का पोस्टर
अरविंद चतुर्वेदी नाम के एक शख्स ने मिर्ज़ापुर के कोतवाली देहात पुलिस स्टेशन में ये FIR करवाई थी. जिसमें कहा गया था कि सीरीज़ ने धार्मिक और क्षेत्रीय भावनाओं को आहत किया है. इससे पहले मिर्ज़ापुर से सांसद और अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने भी 'मिर्ज़ापुर' सीरीज़ का विरोध किया था.
ये एफआईआर धारा 295 (A) 505 आंइपीसी 67 (A) आईटी एक्ट के तहत दर्ज की गई थी. 'मिर्ज़ापुर' वेब सीरीज़ की बात करें तो ये एक क्राइम सीरीज़ है. जिसमें पंकज त्रिपाठी, अली फज़ल, विक्रांस मेसी, दिव्येंदू शर्मा और रसिका दुग्गल जैसे कलाकार नज़र आए थे. # 'तांडव' मेकर्स को नहीं मिली राहत सैफ अली खान की वेब सीरीज़ ‘तांडव’ के मेकर्स के खिलाफ भी देशभर में कई जगह एफआईआर दर्ज करवाई गई थी. जिसकी सुनवाई में मेकर्स को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. कोर्ट ने 27 जनवरी को उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आदेश देने से मना कर दिया. मेकर्स के साथ अमेजॉन प्राइम इंडिया की प्रमुख अपर्णा पुरोहित के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करवाई गई थी. कोर्ट ने इन सभी FIR को आपस में जोड़ने के लिए भी एक नोटिस जारी किया.

'तांडव' सीरीज़ में ज़ीशान अयूब का वो सीन जिसे लेकर खूब बखेड़ा खड़ा हुआ है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा था,
''आपकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है. आप ऐसे किरदारों के रोल नहीं निभा सकते, जिन्हें निभाने से किसी समुदाय की भावनाएं आहत हों”.मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी सीरीज़ से जुड़े लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.




















