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मनोज बाजपेई की नई फिल्म यूट्यूब पर हुई रिलीज़, देख लो!

'कृति' मनोज की ही पुरानी फिल्म 'कौन' की याद दिलाती है, वही 'कौन' जिसमें राम गोपाल वर्मा, अनुराग कश्यप अौर मनोज की जुगलबन्दी थी.

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फोटो - thelallantop

हमने 'वो दौर' देखा है. वो दौर जब रामगोपाल वर्मा के लिए अनुराग कश्यप किरदार लिखा करते थे, अौर उन किरदारों को परदे पर निभाते थे मनोज बाजपेई. रामू, कश्यप अौर मनोज की 'सत्या' तो सबको याद है. लेकिन इसी त्रयी की मुझे जो अचर्चित फिल्म ख़ास याद आती है उसका नाम है 'कौन'. फिल्म में तीन ही मुख्य अदाकार हैं.

फिल्म: कौन, निर्देशक: राम गोपाल वर्मा
फिल्म: कौन, निर्देशक: राम गोपाल वर्मा

उर्मिला मातोंडकर अौर सुशांत सिंह के साथ मनोज बाजपेई की यह पूरी फिल्म मुम्बई के एक बड़े बंगले में फिल्माई गई साइकॉलोजिकल थ्रिलर है. उर्मिला घर में अकेली है अौर मनोज अौर सुशांत बिन बुलाए उसके घर में आ घुसे हैं. कमाल की कहानी, अौर शानदार एक्टिंग. पूरी फिल्म में सस्पेंस का एलीमेंट रहता है, लेकिन फिल्म का अन्त कमाल का टर्न लेते हुए हॉरर फ्लैश है. 'कौन' आज भी मेरी फेवरिट भारतीय थ्रिलर फिल्मों में शामिल है.

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इधर नई शॉर्ट फिल्म आई है, 'कृति'. अपनी सुपर फ्लॉप फिल्मों अौर सुपरहिट ट्विटर टाइमलाइन के लिए मशहूर निर्देशक शिरीष कुंदर की पहली शॉर्ट फिल्म. लम्बाई 18 मिनट. 'कृति' देखते हुए मुझे राम गोपाल वर्मा की 'कौन' याद आई. शिरीष की फिल्म में 'कौन' जैसा चमत्कार तो नहीं है, लेकिन इन शॉर्ट फिल्मों के साथ भारतीय सिनेमा फीचर के अलावा सिनेमा के अन्य फॉर्मेट्स के लिए खुल रहा है, यह देखना अच्छा है.

सपन (मनोज बाजपेई) अपनी मनोचिकित्सक कल्पना (राधिका आप्टे) के सामने है. सपन को फिर प्यार हो गया है. लेकिन जब सपन मनोचिकित्सक को बताता है कि उसकी ये नई प्रेमिका कृति (नेहा शर्मा) कभी घर से बाहर नहीं आती अौर सोशल मीडिया पर भी नहीं है, कल्पना का माथा ठनकता है. सपन बताता है कि बात कुछ भी नहीं, कृति को एग्रोफोबिया है (सार्वजनिक स्थानों पर जाने से भय) लेकिन कल्पना उसे रचना की याद दिलाती है, उसकी पिछली प्रेमिका. कल्पना को शक है कि रचना की तरह कृति भी सच्चाई नहीं, सिर्फ़ सपन के दिमाग़ की रचना है. क्या सच है क्या झूठ, यह जानने सपन वापस अपने घर पहुंचता है, अौर आगे अप्रत्याशित हो जाता है. अच्छा आगे नहीं बताऊंगा, फिल्म देखिए −

'कृति' सरल फिल्म है, अौर किसी शॉर्ट फिल्म के बेसिक्स सही रखते हुए यह कहानी में ज़्यादा जटिलताएं नहीं खड़ी करती. फिल्म की ताकत हैं इसके अभिनेता, जिनमें मनोज अौर राधिका के साथ छोटी सी भूमिका में आए 'अोये लक्की लक्की अोये' वाले बंगाली मनु ऋषि चढ्ढा एकदम सटीक सही हैं. फिल्म की कमज़ोरी है इसकी सेटिंग, जिसको डिज़ाइनर पर्फेक्ट बनाने की कोशिश में रिएलिटी से फिल्म का संबंध छूट गया है. लगता ही नहीं कि किरदार अपने घर में हैं, लगता है जैसे किसी आर्ट गैलेरी में पूरी फिल्म शूट की गई है.

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https://youtu.be/b5GGKuK3iEI

अभिनेताअों मनोज बाजपई अौर राधिका आप्टे के लिए यह करियर का बहुत ही उर्वर दौर है. मनोज ने तो जैसे धमाके के साथ अपनी सेकेंड इनिंग्स शुरु की है. राधिका आप्टे ने 'फोबिया' में अौर मनोज बाजपेई ने 'अलीगढ़' में अपनी पिछली भूमिकाअों के साथ अपने भीतर के उज्ज्वल अभिनेता को स्थापित किया है. इसके अलावा दोनों ही पिछले दिनों आई अपनी शॉर्ट फिल्मों 'अहल्या' अौर 'तांडव' में सराहे गए हैं.


शॉर्ट फिल्म तांडव में मनोज बाजपेई
शॉर्ट फिल्म तांडव में मनोज बाजपेई

अचानक शॉर्ट फिल्में भारतीय सिनेमा में उम्दा कलाकारों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का सबसे पसंदीदा प्लेटफॉर्म बन गया है. राधिका आप्टे अौर रत्नाबाली भट्टाचार्जी जैसी कमाल अभिनेत्रियों की प्रतिभा हमने इन्हीं शॉर्ट फिल्मों में देखीं. 'मसान' वाले नीरज घेवान भी 'एपिफेनी' अौर 'शोर' जैसी शॉर्ट फिल्में बनाकर ही निर्देशन की दुनिया में आए. आज इस नई सोशल मीडिया की दुनिया में यह सिनेमा का सबसे बड़ा टैलेंट शो प्लेटफॉर्म है.

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