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मणिपुर के हालात फिर बिगड़े, गोलाबारी हुई, भीड़ ने चौकी के दरवाजे तोड़कर हथियार लूट लिए, 17 घायल

कुकी समुदाय के किस फैसले को लेकर मैतई नाराज हो गए और बवाल कर दिया?

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मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, 17 लोग घायल (सांकेतिक फोटो- PTI)

मणिपुर (Manipur) में हालात फिर बिगड़ने लगे हैं. गुरुवार, 3 अगस्त को हुई हिंसा में 17 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है. घटना बिष्णुपुर जिले के कांगवई और फौगाकचाओ इलाके की है. खबर है कि बेकाबू भीड़ ने सुरक्षा बलों पर हमला किया और उनके हथियार भी लूट लिए. जवाब में सुरक्षा बलों ने हवाई फायरिंग की और आंसू गैस के गोले छोड़े.

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कैसे हुई शुरुआत? 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा की वजह बनी वो योजना जिसके तहत जातीय हिंसा में मारे गए 35 कुकी-जोमी लोगों को सामूहिक रूप से दफनाने की बात कही गई थी. मृतक चुराचांदपुर जिले में बिष्णुपुर की सीमा से सटे हाओलाई खोपी गांव के थे. 3 अगस्त की सुबह मणिपुर हाई कोर्ट के आदेश पर इस योजना को स्थगित कर दिया गया. इसी दौरान हजारों स्थानीय लोग सुरक्षा बलों की आवाजाही को रोकने के लिए सड़कों पर उतर आए.

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सामूहिक तौर शवों को दफनाए जाने का विरोध कर रहीं मैतेई समुदाय से जुड़ी महिलाओं ने बिष्णुपुर में बनाए गए बफर जोन को पार करने की कोशिश की. मांग की कि उन्हें दफन स्थल तुइबुओंग तक जाने की अनुमति दी जाए. 

सुरक्षा बलों पर हमला

आजतक से जुड़े आशुतोष मिश्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, असम राइफल्स ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया. पहले मिर्च का स्प्रे कर भीड़ को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन भीड़ शांत नहीं हुई. इसके बाद सुरक्षाबलों को हवाई फायरिंग करनी पड़ी. सेना और RAF जवानों ने भीड़ को काबू करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े. सशस्त्र बलों और उपद्रवियों के बीच गोलीबारी भी हुई जिसमें कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए. सूत्रों के मुताबिक, घटना के पीछे अरामबाई तेंगगोल और मैतेई लीपुन का हाथ है. मणिपुर पुलिस ने बताया कि सुरक्षा बलों ने सात अवैध बंकरों को नष्ट किया है.

वहीं विष्णुपुर के नरनसेना इलाके में भीड़ ने इंडियन रिजर्ब बटालियन (IRB) की एक चौकी पर हमला कर दिया. भीड़ ने दरवाजे और खिड़की तोड़कर गोला-बारूद समेत कई हथियार लूट लिए. 

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लूटे गए हथियारों की लिस्ट (फोटो- आजतक)

उधर, इंफाल पूर्व और इंफाल पश्चिम के जिला मजिस्ट्रेटों ने कर्फ्यू में कुछ ढील की घोषणा की थी. वो अब वापस ले ली गई है. एहतियात के तौर पर पूरी इंफाल घाटी में रात के साथ-साथ दिन का कर्फ्यू भी लगा दिया गया है.

कांग्रेस ने पूछा पीएम मोदी कब बोलेंगे?

वहीं, देश की राजधानी दिल्ली में मणिपुर हिंसा का मुद्दा अभी भी विपक्ष उठा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में कांग्रेस नेता शशि थरूर ने मणिपुर हिंसा को लेकर कहा कि देश में इससे गंभीर मुद्दा क्या हो सकता है और इस पर प्रधानमंत्री कैसे चुप रह सकते हैं. उन्होंने कहा कि 2002 में गुजरात दंगों पर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी बयान दिया था, ऐसे कई और उदाहरण हैं. आगे बोले- ‘हम एक उचित मांग कर रहे हैं.’ 

वीडियो: CJI चंद्रचूड़ ने मणिपुर हिंसा पर पुलिस को फटकार लगाते हुए क्या कहा, DGP को ये निर्देश

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