कोलकाता में क्वेस्ट मॉल है. मॉल माने मस्ती का अड्डा, सभी जाते ही हैं. इसी मॉल में आशीष अविकुंतक नाम के शख्स को घुसने नहीं दिया गया. आशीष फिल्मकार हैं. उनकी दोस्त देबलीना सेन ने फेसबुक पर पोस्ट लिखकर सारा मामला क्लियर किया. देबलीना ने लिखा है कि रेस्टोरेंट्स ने पहले मना किया था, अब एक मॉल ने किसी की एंट्री पर रोक लगाई है. धोती कुर्ता पहन रखे शख्स को मॉल में नहीं घुसने दिया गया. इस मॉल में धोती या लुंगी पहनकर अंदर आना मना है. ये बेहद घिनौना भेदभाव है. मॉल के बाहर गार्ड्स ने उनके दोस्त को रोका. फिर वॉकी टॉकी पर बात की. मेरा दोस्त इंगलिश में बहस करने लगा. उसके बाद उसे अंदर जाने दिया गया. अंदर मैनेजमेंट के लोगों ने भी यही कहा कि धोती या लुंगी पहनकर हम किसी को अंदर आने नहीं देते. वो फेसबुक देख ली जाए. वहां गार्ड्स ने वीडियो शूट करने से भी मना किया था लेकिन देबलीना ने कर लिया. इतना ड्रेस कोड तो मंदिर में भी नहीं होता है भाई. वहां कोई भी कुछ भी पहन के जाता है. लुंगी या धोती तो बेहद खुली होती है यार. उसमें कोई बम भी नहीं छिपा के ला सकता. मॉल वालों को धोती से क्या दिक्कत हो सकती है. कहीं उनको ये तो नहीं लगता कि जो चीज हमारे मॉल में बिक नहीं रही है वो पहन के कोई आ भी नहीं सकता. धोती पहनने से मॉल में घुसने की योग्यता आदमी खो देता है, ये लॉजिक तो कसम से जानलेवा है. मुंबई मेरी जान नाम की एक फिल्म आई थी. उसमें इरफान खान अपनी फैमिली के साथ मॉल में जाता है. वो बेहद गरीब आदमी होता है इसलिए गार्ड्स उस पर खास नजर रखते हैं. वो जब परफ्यूम छि़ड़कने लगता है तो उसे उठाकर बाहर फेंक दिया जाता है. क्योंकि उसने अपनी औकात से बाहर का सपना देख रखा होता है. फिर वो बदला लेने के लिए मॉल में बम की अफवाह फैला देता है. लेकिन इतने अमानवीय घटनाक्रम में भी उसे गले में रुमाल लपेटने की वजह से मॉल में न घुसने दिया गया हो, ऐसा नहीं होता.
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इस आदमी को मॉल में घुसने से रोका गया, वजह जानकर माथा पीट लोगे
ये आदमी एक फिल्मकार है, लेकिन इस बड़े मॉल के लिए बेकार है.
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फोटो - thelallantop
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