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यूपी: मुर्दाघर के फ्रीजर में जीवित पाए गए श्रीकेश को बचाया नहीं जा सका!

मेरठ में इलाज के दौरान श्रीकेश की मौत हो गई.

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मृतक श्रीकेश (बाएं). सीएमएस डॉ शिव सिंह (बीच में). मृतक के जीजा (दाएं)
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में जिस शख्स को मुर्दा करार दिए जाने के बाद जिंदा पाया गया था, उसकी आखिरकार मौत हो गई. श्रीकेश नाम के इस शख्स ने मंगलवार 23 नवंबर को दम तोड़ दिया. पिछले हफ्ते 18 नवंबर को श्रीकेश का ऐक्सिडेंट हुआ था. इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था. लेकिन बाद में उनके जीवित होने का दावा किया गया.

क्या था मामला?

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक गुरुवार 18 नवंबर की शाम श्रीकेश घर से दूध लेने के लिए निकले थे. लेकिन रास्ते में उनका ऐक्सिडेंट हो गया. उन्हें गंभीर हालत में इलाज के लिए तीन अलग-अलग निजी अस्पतालों में ले जाया गया. आखिर में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया. वहां इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर मनोज ने श्रीकेश का चेकअप करके उन्हें मृत घोषित कर दिया. इसके बाद शव को मोर्चरी में भिजवा दिया गया. अगले दिन यानी 19 नवंबर की सुबह 11 बजे पुलिस लाश का पंचनामा करने जिला अस्पताल पहुंची. रिपोर्ट के मुताबिक उस दौरान श्रीकेश के परिजनों ने देखा की उनकी सांसें चल रही हैं. इस बात को लेकर मोर्चरी में हंगामा मच गया. परिजनों ने तुरंत इस बात की जानकारी अस्पताल के डॉक्टरों को दी. सूचना मिलते ही मोर्चरी में पहुंचे डॉक्टरों ने श्रीकेश का चेकअप कर उनके जिंदा होने की पुष्टि की. इसके बाद फौरन इलाज शुरू किया गया. श्रीकेश की हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें मेरठ रेफ़र कर दिया. मेरठ में चार दिन तक श्रीकेश का इलाज चला. लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. बीते मंगलवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. श्रीकेश कुमार स्थानीय नगर निगम में काम करते थे. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक मुरादाबाद जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ शिव सिंह ने बताया,
"कल शाम इलाज के दौरान श्रीकेश का निधन हो गया. स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच कर रहा है."
वहीं श्रीकेश के एक रिश्तेदार किशोरी लाल ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा,
"उस समय (मुरादाबाद जिला अस्पताल में इलाज के दौरान) जो डॉक्टर इमरजेंसी ड्यूटी पर थे, उन्होंने श्रीकेश का चेकअप कर के ये कह दिया कि ना इनकी नब्ज चल रही है ना ही बीपी. उन्होंने कहा कि ये मर चुके हैं."
किशोरी लाल और परिवार के बाकी लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल में इलाज के दौरान ही डॉक्टरों ने लापरवाही बरती थी, जिसकी वजह से श्रीकेश की मौत हो गई.

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