अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र में क्या है? इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक निसार अहमद ने अदालत से गुजारिश की है कि साध्वी प्रज्ञा की जमानत फौरन खारिज की जानी चाहिए. अहमद ने साध्वी की उस याचिका को भी खारिज करने की मांग की है, जिसमें उन्होंने अदालत से केस में खुद को बरी करने की मांग की थी. निसार अहमद ने कहा है कि जब NIA इस केस में कोई पहल नहीं कर रही है, तो मेरी ये जिम्मेदारी है कि मैं सारे डेवलपमेंट के बारे में कोर्ट को जानकारी दूं, क्योंकि इन सबसे बम ब्लास्ट के पीड़ितों को तकलीफ पहुंच रही है. 'मैं अदालत से गुजारिश करूंगा कि आरोपी नंबर 1 (प्रज्ञा ठाकुर) को मुंबई में अदालत में हाजिर होने के लिए कहा जाए. और उनको चुनाव लड़ने से रोका जाए, क्योंकि अदालती कार्यवाही अब भी चल रही है. यही नहीं, उनकी जमानत खारिज करने की एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है. उसने प्रज्ञा ठाकुर की जमानत खारिज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है, इस पर बीते साल जुलाई में उन्हें नोटिस भी जारी हो चुका है.'

अदालत में पेशी के लिए जाना पड़ता है अभी भी प्रज्ञा सिंह को. फाइल फोटो.
हाईकोर्ट में क्या लिखकर दिया था साध्वी प्रज्ञा ने? केस में वकील शाहिद नदीम ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि निसार अहमद की ओर से अदालत को अहम जानकारी दी गई है. इसमें एनआईए कोर्ट को बताया गया है कि जमानत के वक्त प्रज्ञा ठाकुर ने बॉम्बे हाईकोर्ट में लिखित बयान दिया था. इसमें उन्होंने कहा था कि वे बेहद कमजोर हो गई हैं. और चल फिर नहीं पाती हैं. उनको ब्रेस्ट कैंसर हुआ है. इसी आधार पर उनको यानी साध्वी प्रज्ञा को 25 अप्रैल, 2017 को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी. अब निसार अहमद ने कोर्ट को बताया है कि साध्वी प्रज्ञा पूरी तरह स्वस्थ्य हैं. शायद इसीलिए इतनी गर्मी में वे चुनाव लड़ रही हैं. उन्होंने अदालत को गुमराह किया है. हाईकोर्ट ने जमानत देते वक्त ये कहा भी था कि
'आवेदक (साध्वी प्रज्ञा) की मेडिकल रिपोर्ट से पता चलता है कि वे बहुत कमजोर हैं. चलने फिरने के लिए भी उन्हें सहारे की जरूरत है. उनका इलाज आयुर्वेदिक अस्पताल में चल रहा है. और हमारी राय में आयुर्वेदिक अस्पताल में आवेदक (साध्वी प्रज्ञा) को उचित इलाज नहीं दिया जा सकता है. क्योंकि वे कैंसर से पीड़ित हैं.'हाईकोर्ट ने आगे कहा था कि
जमानत पूरी तरह केस के तथ्यों और परिस्थितयों के आधार पर दी जा रही है. होईकोर्ट ने जमानत देते वक्त कहा था कि निचली अदालत में सुनवाई के वक्त प्रज्ञा सिंह की जब भी जरूरत होगी, उनको उपस्थित रहना होगा.इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक निसार अहमद ने अपनी याचिका में कहा है कि वे (प्रज्ञा ठाकुर) अदालत की सुनवाई को गंभीरता से नहीं ले रही हैं. इससे ट्रायल के दौरान उनकी मौजूदगी को लेकर संदेह पैदा करता है. इस वक्त कोई भी आरोपी सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित नहीं हो रहा है. वे ये कहकर सुनवाई में नहीं आ रहे हैं कि उनको काफी दूर से पेशी पर आना पड़ता है. प्रज्ञा ठाकुर के वकील रंजीत सांगले के मुताबिक वे (प्रज्ञा ठाकुर ने) सुनवाई के लिए भोपाल से यहां तक आती हैं. इसी आधार पर सुनवाई के दौरान हाजिरी माफी मिली हुई है. अदालत को जब भी जरूरत होगी वो कोर्ट में मौजूद रहेंगी.
महाराष्ट्र के मालेगांव में साल 2008 में एक बम धमाका हुआ था. इसमें छह लोग मारे गए थे और करीब 106 लोग घायल हुए थे. साध्वी प्रज्ञा पर धमाके मेंं शामिल होने का आरोप है.
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