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गाड़ी पर "दूल्हा-दुल्हन" लिखकर इंकम टैक्स वालों ने छापा मारा, 390 करोड़ पकड़ लिए!

कोडवर्ड था "दुल्हन हम ले जाएंगे" फिर इतना कैश मिला कि 13 घंटे तक नोट गिनते रहे.

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छापेमारी में मिले कैश गिनने में करीब 13 घंटे लग गए (फोटो: एएनआई)

महाराष्ट्र (Maharashtra) के जालना में आयकर विभाग (IT) को एक स्टील, कपड़ा व्यापारी और रियल एस्टेट डेवलपर के यहां छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में बेनामी संपत्ति मिली है. जालना में कुछ बिजनेस ग्रुप्स से जुड़े कई ठिकानों पर IT की छापेमारी की गई थी. बताया जा रहा है कि छापेमारी में IT डिपार्टमेंट ने करीब 390 करोड़ की बेनामी संपत्ति जब्त की है. इसमें 58 करोड़ रुपए कैश, 32 किलो सोने के गहने, 16 करोड़ रुपए के हीरे, मोती और कई प्रॉपर्टी के कागजात शामिल हैं.

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1 से 8 अगस्त तक चली आयकर विभाग की कार्रवाई

आजतक के दिव्येश सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक एसआरजे स्टील (SRJ Steel), कालिका स्टील (Kalika Steel), एक को-ऑपरेटिव बैंक, फाइनेंसर विमल राज बोरा, डीलर प्रदीप बोरा के ठिकानों पर 1 से 8 अगस्त तक ये कार्रवाई की गई.

वहीं आजतक के पंकज खेलकर की रिपोर्ट के मुताबिक इस छापेमारी में आयकर विभाग के 260 अफसर और कर्मचारी शामिल थे. इसके लिए 120 से ज्यादा गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया. इस ऑपरेशन को एक ही समय में पांच अलग-अलग टीमों ने अंजाम दिया. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नासिक विंग ने मराठवाड़ा के जालना और औरंगाबाद शहरों में कई ठिकानों पर रेड मारी.

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कैश गिनने में लग गए 13 घंटे

रिपोर्ट के मुताबिक आयकर विभाग की टीम को छापेमारी में मिले कैश गिनने में करीब 13 घंटे लग गए. कैश को जालना के स्थानीय स्टेट बैंक की ब्रांच में ले जाकर गिना गया. सुबह 11 बजे से कैश गिनने का काम शुरू हुआ, जो देर रात 1 बजे तक चला.

रिपोर्ट के मुताबिक आयकर विभाग को जालना की चार स्टील कंपनियों में अनियमितता की सूचना मिली थी. इसके बाद विभाग एक्शन में आया. उसने संबंधित ठिकानों पर छापेमारी की और शहर के बाहर फार्म हाउस में नगदी और सोना-हीरा सहित प्रॉपर्टी के कागजात बरामद किए.

टीम का कोड वर्ड था- 'दुल्हन हम ले जाएंगे’

आजतक के प्रवीन ठाकरे की रिपोर्ट के मुताबिक आयकर विभाग की टीम ने इस रेड को बेहद सीक्रेट रखा. इसके लिए हर तरह की एहतियात बरती गई. टीम ने अपनी गाड़ियों पर दूल्हा और दुल्हन के नाम के स्टिकर चिपका रखे थे, जिससे ऐसा लगे कि ये गाड़ियां किसी शादी में जा रही हैं. सभी गाड़ियों की पहचान के लिए कोड वर्ड था- ‘दुल्हन हम ले जाएंगे’. इसी कोड वोर्ड के जरिए अफसरों की गाड़ियों की पहचान की जा रही थी.

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