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जिस युवा किसान को सरकार ने सम्मानित किया, उसने पानी के संकट पर जान दे दी, खेत में मिला शव

गुरुवार की सुबह किसान का शव उन्हीं के खेत में पाया गया. मृतक किसान को महाराष्ट्र सरकार ने साल 2020 में युवा किसान पुरस्कार से सम्मानित किया था. पिछले महीने शिवानी आरमाल तालाब पर गांव वालों को पानी से हो रही दिक्कतों के मुद्दे पर वह 5 दिन तक अनशन पर भी बैठे थे.

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पांच साल पहले सरकार से पुरस्कार मिला था, अब किसान ने जान दे दी. (तस्वीरें- आजतक)
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ऋत्विक भालेकर

महाराष्ट्र के बुलढाना जिले के एक किसान का शव उसके खेत में मिला है. मृतक को कुछ साल पहले महाराष्ट्र सरकार ने युवा किसान पुरस्कार से सम्मानित किया था. माना जा रहा है कि उसने पानी की समस्या को लेकर आत्महत्या की है. मृतक ने अपनी आखिरी मांग में कहा है कि जब तक पानी की समस्या हल न हो जाए, उसके ‘शव को हिलाया भी नहीं जाए’.

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आजतक से जुड़े रित्विक भालेकर की रिपोर्ट के मुताबिक, बुलढाना के देवलगावराजा तहसील के शिवनी आरमाल नामक गांव में रहने वाले 43 साल के किसान कैलास नागरे ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. गुरुवार को तड़के उनका शव उन्हीं के खेत में पाया गया. मृतक किसान को महाराष्ट्र सरकार ने साल 2020 में युवा किसान पुरस्कार से सम्मानित किया था. पिछले महीने शिवानी आरमाल तालाब पर गांव वालों को पानी से हो रही दिक्कतों के मुद्दे पर वह 5 दिन तक अनशन पर भी बैठे थे.

रिपोर्ट के मुताबिक मृतक किसान की जेब से एक कागज भी मिला है, जिसे सुसाइड नोट बताया जा रहा है. इसमें आत्महत्या की वजह इलाके के किसानों को पानी नहीं मिलना बताया गया है. नोट में कैलास नागरे के इस मुद्दे पर 5 दिन तक किए अनशन का भी उल्लेख है. साथ ही ये भी लिखा है कि जिला परिषद के पूर्व सदस्य भगवान मुंडे ने खड़कपूर्णा तालाब की बाई नहर के लिए जो आंदोलन किया था, उसकी मांगों को जल्द मंजूर किया जाए. कथित तौर पर किसान ने लेटर में आगे कहा है कि जब तक पानी की समस्या का हल नहीं निकलेगा तब तक उनके शव को हिलाना नहीं है. 

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कैलास नागरे के परिवार में उनके पिता, पत्नी और उनकी 3 संतान हैं. यह घटना उस समय सामने आई है, जब महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या को लेकर जमकर सियासी बवाल मचा है. बीते सोमवार को महाराष्ट्र के राहत और पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव पाटिल ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में पिछले 56 महीनों में औसतन हर रोज़ 8 किसानों ने आत्महत्या की. वे विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान NCP MLC शिवाजीराव गरजे द्वारा उठाए गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे. मंत्री ने बताया कि 1 जनवरी, 2024 से 31, दिसंबर 2024 के बीच छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में 952 किसानों ने आत्महत्या की.

(अगर आप या आपके किसी परिचित को खुद को नुकसान पहुंचाने वाले विचार आ रहे हैं तो आप इस लिंक में दिए गए हेल्पलाइन नंबरों पर फोन कर सकते हैं. यहां आपको उचित सहायता मिलेगी. मानसिक रूप से अस्वस्थ महसूस होने पर डॉक्टर के पास जाना उतना ही ज़रूरी है जितना शारीरिक बीमारी का इलाज कराना. खुद को नुकसान पहुंचाना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है.)

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