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पिता का घर छोड़ बॉयफ्रेंड के साथ रहना था, मामला हाई कोर्ट जा पहुंचा, लड़की, बोली '21 का होने पर ...'

Bombay High Court में 9 दिसंबर को 19 साल की एक लड़की ने अपना बयान दर्ज कराया. जिसमें उसने कहा कि वो अपने माता-पिता के साथ नहीं, बल्कि अपने साथी के साथ रहना चाहती है.

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बॉम्बे हाईकोर्ट लड़के की याचिका पर सुनवाई कर रही थी (फाइल फोटो)

बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) में 9 दिसंबर को 19 साल की एक लड़की ने अपना बयान दर्ज कराया. जिसमें उसने कहा कि वो अपने माता-पिता के साथ नहीं, बल्कि अपने साथी के साथ रहना चाहती है. हालांकि लड़के की उम्र 21 साल नहीं हुई है, इसलिए कोर्ट की तरफ से लड़की को समझाने की कोशिश की गई. हालांकि लड़की की तरफ से कहा गया कि वो अपने 20 साल के बॉयफ्रेंड के साथ रह लेगी. जब वो 21 साल (शादी की कानूनी उम्र) का हो जाएगा, तब दोनों शादी की तरफ कदम बढ़ाएंगे.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक लड़की 19 साल की है. जबकि वो जिस लड़के के साथ रहना चाहती है, वो 20 साल का है. दोनों के धर्म भी अलग हैं. लड़की के पिता ने इसके खिलाफ पुलिस में एक कंप्लेंट फाइल की थी. जिसके बाद लड़की को थाने बुलाया गया था. लड़की ने अपने माता-पिता के साथ रहने से साफ इनकार कर दिया था. जिसके बाद पुलिस ने लड़की को मुंबई के चेंबूर स्थित एक शेल्टर होम में भेज दिया था.

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लड़के ने दायर की याचिका

पुलिस की तरफ से लड़की को शेल्टर होम भेजे जाने के बाद लड़के की तरफ से बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी. जिसमें लड़की को शेल्टर होम से रिहा किए जाने की मांग की गई. याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता और लड़की दोनों व्यस्क हैं और अपने जीवन के बारे में निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम हैं. साथ ही, यह भी कहा गया है कि लड़की अपने माता-पिता का घर छोड़कर अपनी मर्जी से याचिकाकर्ता के पास रहने आई है.

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इस मामले पर पर 9 दिसंबर को जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की पीठ ने सुनवाई की. सुनवाई के दौरान लड़की को भी कोर्ट में पेश किया गया. इस दौरान जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की पीठ के सामने लड़की ने अपना बयान दर्ज कराया. जिसमें कहा गया कि वो अपने माता-पिता के साथ नहीं बल्कि अपने साथी के साथ रहना चाहती है, भले ही लड़के की उम्र महज 20 साल है और वो कानूनी रूप से उससे शादी करने की स्थिति में नहीं है. 

लड़की ने कहा कि वो अपने साथी के 21 वर्ष होने तक इंतजार करेगी. भारत में लड़कों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष है. लड़की ने कोर्ट को ये भी बताया कि वो 19 वर्ष से थोड़ी अधिक उम्र की है और उसने ब्यूटीशियन का कोर्स किया है. लड़की ने कहा कि उसने अभी तक याचिकाकर्ता से शादी नहीं की है, लेकिन भविष्य में उससे शादी करेगी. लड़की ने ये भी बताया कि जब तक याचिकाकर्ता विवाह योग्य नहीं हो जाता, तब तक उसे उसके साथ रहने में कोई समस्या नहीं है.

माता-पिता से बताया जान को खतरा

पीठ ने इस दौरान पूछा कि क्या वो और याचिकाकर्ता जानते हैं कि वे अपने दम पर कैसे जीवन यापन करेंगे? हालांकि, लड़की के पास कोई स्पष्ट उत्तर नहीं था. वहीं याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि उसने अंडरगारमेंट कपड़ों का व्यवसाय शुरू किया है और उसे इससे कुछ पैसे कमाने की उम्मीद है. इस दौरान लड़की ने कोर्ट से कहा कि वो अपने माता-पिता के घर नहीं जाना चाहती, क्योंकि उसकी जान को खतरा है. पीठ ने लड़की के पिता को अदालत परिसर में उससे मिलने की अनुमति दी और लड़की से कहा कि उसे माता-पिता से कोई खतरा नहीं है. उसे पिता को केवल उसकी चिंता है. पीठ ने ये भी समझाया कि पहले उसे लड़के को घर बसाने दो और फिर उससे शादी करने का फैसला करो. बावजूद इसके लड़की अपनी बात को लेकर अड़ी रही.

बताते चलें कि पीठ ने इस याचिका पर बुधवार यानी 11 दिसंबर को दोबारा सुनवाई करने का फैसला किया है.

 



 

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