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थलापति विजय को तमिलनाडु की राजनीति का 'Thalaivar' इस आदमी ने बनाया

थलापति विजय तो इस जीत के हीरो बने ही, लेकिन साथ ही उनका इलेक्शन कैंपेन संभालने वाले कपिल साहू भी खूब चर्चा में हैं.

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विजय की बड़ी जीत के पीछे कपिल साहू का दिमाग है. (फोटो- India today)

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  • तमिलनाडु में थलापति विजय की TVK पार्टी ने पहले चुनाव में 234 विधानसभा सीटों में से 108 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की।
  • तमिलनाडु की राजनीति में DMK और AIADMK की लंबी सत्ता प्रतिस्पर्धा के बीच विजय की पार्टी ने एंटी-इंकम्बेंसी भावना को बदलकर अपने पक्ष में किया।
  • इस जीत के बाद थलापति विजय मुख्यमंत्री बनने की तैयारी कर रहे हैं और उनका चुनावी अभियान नई तकनीकों और जनसमर्थन के जरिए आगे बढ़ रहा है।

तमिलनाडु में एक्टर से नेता बने थलापति विजय की पार्टी टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) ने अपने पहले ही चुनाव में कमाल कर दिया. प्रदेश की 234 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में 108 सीटें जीत लीं. थलापति विजय तो इस जीत के हीरो बने ही, लेकिन साथ ही उनका इलेक्शन कैंपेन संभालने वाले कपिल साहू भी खूब चर्चा में हैं. जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के आईपैक के साथ काम कर चुके कपिल साहू ने 12 लोगों की अपनी टीम के साथ विजय के पॉलिटिकल कैंपेन को डिजाइन किया.

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चुनाव के नतीजे आने के बाद उन्होंने हिंदी अखबार दैनिक भास्कर से बात की. इसमें कपिल साहू ने बताया कि भोपाल के नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट से उन्होंने पढ़ाई की है. इसके बाद डेटा और ग्राउंड मैनेजमेंट में करियर बनाया. फिर IPAC (India political Action committee) से जुड़े. यह पहले प्रशांत किशोर का ऑर्गनाइज़ेशन था, जिसने बीजेपी के 2014 वाले चुनावी कैंपेन समेत कई बड़ी पार्टियों के लिए काम किया. बाद में प्रशांत किशोर ने जन सुराज नाम से पार्टी बनाई और IPAC से अलग हो गए. 

इसके बाद कपिल साहू ने 12 मेंबर्स की अपनी टीम बनाई और आम आदमी पार्टी और सिक्किम डेमोक्रेटिक फर्म जैसी पार्टियों के राजनीतिक सलाहकार के तौर पर काम किया. बाद में वह तमिलनाडु चुनाव के लिए थलापति विजय के साथ जुड़ गए. तमिलनाडु चुनाव में विजय की पार्टी पहली बार खड़ी हो रही थी. विजय भी एक्टर से नेता बने थे. ऊपर से उनसे जुड़े कुछ विवाद भी हो गए थे, जिससे बाहर निकालने की चुनौती कपिल साहू और उनकी टीम के सामने थी. जैसे, विजय की एक रैली में भगदड़ से कई लोगों की मौत हो गई. इसके अलावा, उनके एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की खबरें भी विजय की इमेज को नुकसान पहुंचा रही थीं. 

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इन सबको ध्यान में रखते हुए कपिल की टीम ने उनका ऐसा पॉलिटिकल कैंपेन डिज़ाइन किया, जिसने विजय की पार्टी को ऐसी जीत दिला दी कि पहले चुनाव के बाद ही वह मुख्यमंत्री बनने की तैयारी में हैं. ये सब उन्होंने कैसे किया, चलिए ये भी जान लेते हैंः 

एंटी-इंकम्बेंसी को ‘मातरम’ में बदलना 

तमिलनाडु में DMK और AIADMK करीब 50 साल एक दूसरे से सत्ता एक्सचेंज कर रही थीं. राज्य में एंटी-इंकम्बेंसी साफ थी. विजय के लिए कपिल ने इसी फीलिंग को ‘मातरम’ की भावना मतलब ‘बदलाव के नैरेटिव’ में बदला. इसके तहत उन्होंने राज्य की जमीनी हक़ीक़त समझी और घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनीं. फिल्म एक्टर के तौर पर विजय को पहले से ही समर्थन था, लेकिन ‘फ्यूचर रेडी’ जैसे नैरेटिव ने उसे वोट में बदला.

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लोकल कल्चर से कनेक्टिविटी 

TVK का चुनाव चिह्न 'सीटी' था. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक कपिल ने इस चुनाव चिह्न को कोलम यानी कि रंगोली के रूप में तब्दील किया. विजय ने लोगों से रिक्वेस्ट की कि सब लोग अपने घरों के आगे कोलम में सीटी की आकृति बनाएं. साथ ही TVK प्रिंट की साड़ियां, नेल आर्ट मार्केट में बहुत चलन में आए. इन सारे कैम्पेन से महिलाएं खूब जुड़ीं और विजय की पार्टी को खूब सपोर्ट किया.

बच्चो को जोड़ना 

TVK ने अपने कैंपेन से बच्चों को जोड़ा. उनसे अपील की गई कि वो अपने पेरेंट्स से जाकर कहें कि वो वोट देने जाएं. सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो आए, जिनमें बच्चे अपने पेरेंट्स को TVK को वोट देने के लिए कन्विंस करते हुए नज़र आए.

राजनीति में टेक्नोलॉजी का इंट्रोडक्शन 

विजय जिन भी रैलियों में जा नहीं पाते थे, वहां वो जनता से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े. कई जगह के कैम्पेन में रोबोट दिखाई दिए जो लोगों को ग्रीट करते हुए नज़र आए. पार्टी के नारों को दोहराते हुए नज़र आए. ये सारे टैक्टिस ने अर्बन और टेक सैवी जनता को ख़ूब प्रभावित किया.

विजय का यूनिफार्म 

पूरे कैम्पेन में विजय सफ़ेद शर्ट और खाक़ी पैंट्स में नज़र आए. उनकी ये सादगी आम लोगों को बहुत पसंद आई. TVK के कार्यकर्ता रैलियों में यहीं कपड़े पहने होते थे. धीरे-धीरे ये ‘विजय यूनिफार्म’ बन गया और आम लोगों ने भी इसे पहनना शुरू कर दिया. वोटिंग के दिन भी कई लोगों ने इसी कपड़े को पहनकर वोट दिया.

वीडियो: तमिलनाडु चुनाव जीतने के बाद थलपति विजय पर कैसे मीम्स बन रहे?

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