महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 31 मई को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले का नाम बदलकर 'अहिल्यानगर' करने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री ने ये घोषणा अहमदनगर जिले के चौंडी गांव के एक कार्यक्रम में की है. इससे पहले औरंगाबाद का नाम भी बदला गया है.
एक और शहर का नाम बदल गया, नए नाम की कहानी दिलचस्प है
अहमदनगर अब एक ऐसी रानी के नाम पर जाना जाना जाएगा, जिन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर बनवाया था.


एकनाथ शिंदे अहिल्याबाई होल्कर की 298वीं जयंती के दिन उनके जन्म स्थान चौंडी गांव पहुंचे थे. इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी आए थे. इसी दौरान मुख्यमंत्री ने कहा,
‘अहिल्या देवी के पिता का सरनेम भी शिंदे था और मैं भी शिंदे हूं. सभी की मांग (ज़िले का नाम बदलने की) है. हम अहिल्या देवी के आदर्श को अपनी आंखों के सामने रखकर काम करते हैं. इसलिए, अहमदनगर का नाम जल्द ही अहिल्यानगर किया जाएगा. राज्य सरकार ने यह फैसला किया है. यह हमारा सौभाग्य है कि नाम बदलने का फैसला हमारे कार्यकाल में लिया जा रहा है. अहिल्यादेवी का काम हिमालय जितना विशाल है. इसलिए, राज्य सरकार ने अहमदनगर का नाम बदलने का फैसला किया है.’
भारतीय जनता पार्टी फरवरी से ही अहमदनगर जिले का नाम बदलने की मांग कर रही थी, जब सरकार ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद का नाम छत्रपति संभाजी नगर और उस्मानाबाद का नाम धाराशिव कर दिया था. तब एक भाजपा नेता ने न्यूज़ एजेंसी ANI से कहा था ,
पहले के नाम कैसे रखे गए?‘अहमदनगर का नाम बदलकर अहिल्या नगर किया जाना चाहिए. सभी की मांग के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने औरंगाबाद और उस्मानाबाद का नाम बदल दिया है. इसके बाद लोग अहमदनगर का नाम बदलकर अहिल्या नगर करने की भी मांग कर रहे हैं.’
औरंगाबाद (छत्रपति संभाजी नगर) का नाम मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब के नाम पर रखा गया है, जबकि उस्मानाबाद (धाराशिव) का नाम हैदराबाद की रियासत के 20वीं सदी के शासक के नाम पर रखा गया था.
इसी तरह, अहमदनगर का नाम अहमद निज़ाम शाह 1 के नाम पर रखा गया, जिन्होंने 1949 में इस शहर की स्थापना की थी. मलिक अहमद निज़ाम शाह, निज़ाम शाही वंश और अहमदनगर सल्तनत के संस्थापक थे.
थोड़ा अहिल्याबाई होल्कर के बारे में जान लीजिएअहिल्यादेवी होल्कर का जन्म 31 मई 1725 को चौंडी नाम के गांव में हुआ था. दस-बारह वर्ष की आयु में उनका विवाह इंदौर के होल्कर वंश के वारिस खांडेराव होलकर से हुआ था. 1754 में एक युद्ध में खांडेराव की मृत्यु हो गई जिसके बाद होल्कर साम्राज्य की कमान अहिल्याबाई को सौंप दी गई. अहिल्याबाई होल्कर को एक ऐसी महारानी के रूप में जाना जाता है, जिन्होंनें संधियों आदि के ज़रिए अपने राज्य को भी सुरक्षित रखा और परमार्थ का खूब काम किया. उन्होंने अपने राज्य की सीमाओं के बाहर कई प्रसिद्ध तीर्थों में मन्दिर बनवाए, घाट बंधवाए , कुओं और बावड़ियों का निर्माण करवाया, मार्ग बनवाए-सुधरवाए, भूखों के लिए लंगर खोले और प्यासों के लिए प्याऊ शुरू किए. वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर 1780 में अहिल्या बाई ने ही दोबारा बनवाया था.
आधुनिक भारत में कई सरकारों ने जगह-जगह उनकी प्रतिमाएं बनवायी हैं और उनके नाम से कल्याणकारी योजनाएं भी चलाई जा रही हैं.
वीडियो: शिवसेना को लेकर भड़के संजय राऊत बोले- नाम और निशान के लिए 2000 करोड़ की डील हुई















.webp?width=120)

.webp?width=120)


