पीएम नरेंद्र मोदी अभियान चला रहे हैं, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ. क्योंकि पढ़ेंगी बेटियां तभी तो बढ़ेंगी बेटियां.
पिता बेटियों को हल में बांध कर खेत जुतवा रहा है, वजह कलेजा काट देगी
इससे उदास कहानी, इससे विचलित करने वाली तस्वीर आज नहीं देखेंगे.
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आर्थिक तंगी की वजह से किसान की बच्चियों की पढ़ाई छूट गई. (Photo : ANI)
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खेती बर्बाद हो गई. बारिश नहीं हुई. इन हालात में किसानों की दुखभरी ख़बरें पढ़ी होंगी. सुनी होंगी. लेकिन मध्य प्रदेश से जो किसान की एक तस्वीर सामने आई है. वो दहलाने वाली है. किसानों की इससे बुरी हालत नहीं हो सकती. सरकारों के लिए इस तस्वीर से सबक लेना चाहिए. इस तस्वीर में एक किसान है. और बैलों की जगह उसकी दो बेटियां हैं. ये बेटियां बैलों की जगह इस्तेमाल होकर खेत को जोतने में मदद कर रही हैं. सिर्फ इसलिए क्योंकि बाप खेती के लिए दो बैल नहीं खरीद पाया. इस तस्वीर को देखकर कोई भी कराह उठेगा.
मगर देश की सरकारों को सिर्फ मुआवजा ही दिखाई देता है कि चलो कुछ मुआवज़े की घोषणा करो और वोट बटोर लो. लेकिन ये तस्वीर दिखा रही है कि देश के किसान की क्या हालत है. किस कद्र मजबूर है. ऐसे में फसल क्या बेहतर हो सकती है, जब किसानों के पास खेती करने के लिए यंत्र तो छोड़िये एक जोड़ी बैल नहीं हैं.

किसान का नाम सरदार बरेला है. उसके पास बैल खरीदने के पैसे नहीं थे.

किसान की इस हालत पर प्रशासन की अब नजर पड़ी है. वहां के डीपीआरओ आशीष शर्मा ने कहा है कि उन्होंने किसान से बात की है और कहा है कि वह ऐसा काम न करें. किसान को हरसंभव मदद देने की बात भी कही गई है.
आलोचना तो राज्य सरकार और केंद्र सरकार की इस तस्वीर को लेकर भी होनी चाहिए. और ये हालात सिर्फ एक दिन में पैदा नहीं हुए हैं. खेती के तरीकों में सुधार न होने की वजह से ही किसानों की दुर्गति हो रही है. जिसको महज़ मुआवज़े की घोषणा से सही नहीं किया जा सकता. नई नीतियों और मज़बूत नीतियों की ज़रूरत है.
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मगर देश की सरकारों को सिर्फ मुआवजा ही दिखाई देता है कि चलो कुछ मुआवज़े की घोषणा करो और वोट बटोर लो. लेकिन ये तस्वीर दिखा रही है कि देश के किसान की क्या हालत है. किस कद्र मजबूर है. ऐसे में फसल क्या बेहतर हो सकती है, जब किसानों के पास खेती करने के लिए यंत्र तो छोड़िये एक जोड़ी बैल नहीं हैं.

किसान का नाम सरदार बरेला है. उसके पास बैल खरीदने के पैसे नहीं थे.
यह किसान मध्य प्रदेश में सिहोर के बसंतपुर पांगरी गांव में रहता है. किसान का नाम सरदार बरेला है. उसने बताया कि उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह बैल खरीद सके. इसपर उसने मक्का की फसल के लिए बेटियों से खेत जुतवाया.किसान का कहना है कि आर्थिक तंगी की वजह से बच्चियों की पढ़ाई छुड़वानी पड़ी. किसान की बड़ी बेटी राधिका 14 साल की है तो कुंती महज़ अभी 11 साल की है. इन बेटियों को सलाम है, जो बाप की मदद कर रही हैं. लेकिन दुःख इस बात का है कि पढ़ाई छोड़नी पढ़ी. और बैल बनना पड़ा. आर्थिक तंगी क्या नहीं करा लेती, ये इस बात का भी सबूत है.

किसान की इस हालत पर प्रशासन की अब नजर पड़ी है. वहां के डीपीआरओ आशीष शर्मा ने कहा है कि उन्होंने किसान से बात की है और कहा है कि वह ऐसा काम न करें. किसान को हरसंभव मदद देने की बात भी कही गई है.
इस तस्वीर को देखकर किसानों के सुसाइड कर लेने के मामले ज़हन में घूमने लगते हैं. देश का किसान संघर्ष कर रहा है. सरकार सिर्फ वादे कर रही हैं. किसान नए यंत्र का इस्तेमाल तो दूर की बात अपने पुराने तरीकों से भी खेती नहीं कर पा रहे हैं.अभी कुछ दिन पहले ही मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन के वक्त काफी हंगामा हुआ था. किसान इतने गुस्से में थे कि प्रदर्शन हिंसक हो गया था, जिसमें कुछ किसानों की जान भी चली गई थी. किसानों का आरोप था कि जिन लोगों की जान गई उनको पुलिस प्रशासन ने सरकार के कहने पर पीटा था. मुख्यमंत्री शिवराज चौहान की हर तरफ तीखा आलोचना हुई.
आलोचना तो राज्य सरकार और केंद्र सरकार की इस तस्वीर को लेकर भी होनी चाहिए. और ये हालात सिर्फ एक दिन में पैदा नहीं हुए हैं. खेती के तरीकों में सुधार न होने की वजह से ही किसानों की दुर्गति हो रही है. जिसको महज़ मुआवज़े की घोषणा से सही नहीं किया जा सकता. नई नीतियों और मज़बूत नीतियों की ज़रूरत है.
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