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पाकिस्तान में बैठे-बैठे लखनऊ में महिला डॉक्टर को किया डिजिटल अरेस्ट, ढाई करोड़ रुपये निकलवा लिए

Lucknow Doctor Digital Arrest: रुचिका टंडन के साथ 2.8 करोड़ रुपये की ठगी हुई है. कैसे उन्हें धमकाया गया? क्या-क्या हुआ? सब कुछ जानिए और सचेत रहिए...

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रुचिका टंडन SGPGI अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं (फोटो- इंडिया टुडे)

लखनऊ में SGPGI अस्पताल की महिला डॉक्टर के डिजिटल अरेस्ट मामले में नया अपेडट सामने आया है (Lucknow Doctor Digital Arrest). जांच में स्पेशल टास्क फोर्स को पता चला है कि 2 करोड़ 81 लाख रुपये की ठगी में शामिल आरोपियों का कनेक्शन पाकिस्तान से है. देखा गया कि स्कैम के लिए इस्तेमाल किए गए नंबर +92 से शुरू होते हैं जो कि पाकिस्तान का कोड है.

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आजतक से जुड़े सत्यम मिश्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, STF का मानना है कि ठगी करने वाले गैंग का मास्टरमाइंड पाकिस्तान से काम करता है और गैंग मेंबर्स को वहीं से ऑर्डर्स देता है. ये नंबर एक टेलीग्राम ग्रुप से मिले हैं.

पीड़िता की पहचान रुचिका टंडन के तौर पर हुई है. वो SGPGI अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं. करीब एक महीने पहले ठगों ने खुद को CBI और TRAI अधिकारी बताकर रुचिका के साथ 2.8 करोड़ रुपये की ठगी की थी. झूठा मनी लॉन्ड्रिंग केस लगाकर उन्हें कई घंटों तक डिजिटल अरेस्ट किया गया और बैंक खातों की डीटेल ले ली गई. ठगी का एहसास होने पर रुचिका टंडन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. 

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खबर है कि अब STF, नेवी के भगोड़े जवान गोपाल कुमार को रिमांड पर लेकर नंबरों के बारे में पूछताछ करेगी. आरोपी गोपाल फिलहाल जेल में बंद है. उसके गैंग के पास से लैपटॉप और मोबाइल बरामद किए गए थे. उन्ही में टेलीग्राम ग्रुप्स पर पाकिस्तान से जुड़े नंबर मिले हैं. सभी डिवाइसेस को लैब में जांच के लिए भेज दिया गया है. खबर है कि STF ने गैंग के पांच और मेंबर्स को अरेस्ट किया है. आरोपियों में CBI अधिकारी बनकर फोन करने वाले तीन युवक भी शामिल हैं. अब तक मामले में शामिल 11 ठगों को पकड़ा गया है. STF, गैंग से जुड़े अन्य सदस्यों की भी तलाश कर रही है.

ये भी पढ़ें- इंस्पेक्टर बन प्रोफेसर को वीडियो कॉल की, 2 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट, FD तुड़वाई, 54 लाख ठग लिए

इस बीच लखनऊ से ही डिजिटल अरेस्ट का एक और केस सामने आया है. एक रिटायर्ड प्रोफेसर को साइबर क्रिमिनल्स ने लाखों रुपये का चूना लगा दिया है. पीड़िता SGPGI की एसोसिएट प्रोफेसर रह चुकी हैं. इतना ही नहीं, रिटायर्ड प्रोफेसर को लगभग 48 घंटे डिजिटल अरेस्ट करके रखा गया और उनसे 54 लाख से ज्यादा रुपये ठग लिए गए.

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बता दें, डिजिटल अरेस्ट, साइबर क्राइम का एक नया तरीका है जिसमें स्कैमर्स पीड़ित व्यक्ति को वीडियो कॉल पर डरा-धमका कर घर पर ही कैद कर लेते हैं. उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी जाती है. ये सब करके किसी शख्स को इतना परेशान करते हैं कि वो पैसे देने पर मजबूर हो जाता है.

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