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CJI को लिखी गई कानून मंत्री की ये चिट्ठी क्या कॉलेजियम सिस्टम का गेम बदल देगी?

कॉलेजियम के मुद्दे पर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच बहुत समय से खींचतान चल रही है.

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CJI चंद्रचूड़ और किरेन रिजिजू (तस्वीर - India Today)

जजों की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के बीच खींचतान चल रही है. इसी बीच ख़बर आई है कि क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने CJI डी वाई चंद्रचूड़ (DY Chandrchud) को एक पत्र लिखा. पत्र में सिफ़ारिश की है कि जजों की नियुक्ति वाले पैनल में सरकार के लोग होने चाहिए.

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केंद्र और SC का विवाद

कॉलेजियम व्यवस्था. 25 साल पुरानी प्रणाली है, जिसके ज़रिए हाई-कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति और तबादले पर फ़ैसला होता है. कॉलेजियम बॉडी का नेतृत्व CJI यानी चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया करते हैं. इस समय CJI चंद्रचूड़, जस्टिस एस.के. कौल, जस्टिस के.एम. जोसेफ, जस्टिस एम.आर. शाह, जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस संजीव खन्ना कॉलेजियम के सदस्य हैं.

कॉलेजियम सिस्टम को लेकर केंद्र और सुप्रीम कोर्ट का गतिरोध पुराना है. अप्रैल 2021 में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक़, ये तय हुआ था कि कॉलेजियम की सिफ़ारिशों पर कार्रवाई करने के लिए सरकार के पास चार महीने की समयसीमा होगी. वक़ीलों का आरोप है कि सरकार सिफ़ारिशों को टालती है. बेंगलुरु के एडवोकेट्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए सरकार के ख़िलाफ़ अवमानना ​​याचिका दायर भी की है.

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कई बार खुले मंच से कॉलेजियम की आलोचना कर चुके क़ानून मंत्री रिजिजू ने अब CJI को एक चिट्ठी लिखी है. इंडियन एक्स्प्रेस के अनंतकृष्णन की रिपोर्ट के मुताबिक़, चिट्ठी में इस बात को हाइलाइट किया गया है कि जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया अभी तक लंबित है और, सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की मूल्यांकन समिति (SEC) में एक सरकारी नॉमिनी होना चाहिए. हाईकोर्ट में होने वाली नियुक्ति के लिए संबंधित राज्य की सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए. सरकार का दावा है कि ऐसा करने करने से सिस्टम में पारदर्शिता आएगी. सरकार की तरफ से पहले भी ऐसा कहा जा चुका है.

CM बनाम क़ानून मंत्री

इधर इस खबर के सामने आते ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किरेन रिजुजू के इस प्रस्ताव का विरोध किया. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा,

"ये बहुत ही ख़तरनाक है. न्यायिक नियुक्तियों में सरकार का हस्तक्षेप बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए."

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इसका जवाब देते हुए रिजुजू ने कहा,

''मुझे उम्मीद है कि आप कोर्ट के निर्देश का सम्मान करेंगे. यह राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम को रद्द करते हुए सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के निर्देश पर हो रहा है. SC की संविधान पीठ ने कॉलेजियम प्रणाली के MoP को दोबारा गठित करने का निर्देश दिया था.''

किरेन रिजिजू ने ये भी बताया कि माननीय CJI को लिखे पत्र में की गई बातें हाई कोर्ट की संविधान पीठ की टिप्पणियों और निर्देशों के अनुरूप हैं. न्यायपालिका के नाम पर  सुविधाजनक राजनीति उचित नहीं है. भारत का संविधान सर्वोच्च है और इससे ऊपर कोई नहीं है. 

इधर, कॉलेजियम ने अभी तक इस चिट्ठी पर चर्चा नहीं की है. लेकिन केंद्र और सुप्रीम कोर्ट के बीच चल रही बहस क्या है, इस पर हम एक विस्तृत शो कर चुके हैं. देखिए वीडियो:

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: सुप्रीम कोर्ट और नरेंद्र मोदी सरकार के बीच कोलेजियम पर बहस में कौन सही, कौन गलत?

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