जापान में रह रहे कुछ पाकिस्तानियों ने शायद वहां के शहरों को कराची या लाहौर समझ लिया. नियम-कायदों को ताक पर रखकर मस्जिद खड़ी कर दी. इसके बाद जापान में पाकिस्तान के राजदूत को बुलाकर उद्घाटन भी करवा लिया. बाद में पता चला, मस्जिद का निर्माण तो गैरकानूनी है. लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब पाकिस्तानी एम्बेसी ने इस पूरे घटना से पल्ला झाड़ लिया. एम्बेसी उल्टा लोगों को नियम-कायदे का पाठ पढ़ाने लगी. पूरा मामला बताते हैं.
जापान को कराची समझ बिना अनुमति के बनाया मस्जिद, पाकिस्तानियों की हरकत पर सिर पीट लेंगे!
Mosque in Japan: जापान की राजधानी टोक्यो से लगभग 40 किलोमीटर दूर कावागोए शहर में पाकिस्तानी समुदाय ने मस्जिद बना ली. पाकिस्तानी राजदूत भी उद्घाटन में शामिल हुए. खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी.


जापान में एक शहर है कावागोए, राजधानी टोक्यो से लगभग 40 किलोमीटर दूर. इसे लिटिल एडो भी कहते हैं, क्योंकि शहर में जापान के स्वर्णिम युग माने जाने वाले एडो-काल की ऐतिहासिक इमारतें और गोदाम हैं. इस ऐतिहासिक शहर में कुछ ही समय पहले पाकिस्तानी समुदाय के लोगों ने एक मस्जिद बनवाई. अप्रैल में जापान में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद ने इसका उद्घाटन किया.
बिना अनुमति के बनाई थी मस्जिदलेकिन अब पता चला है कि मस्जिद को बनाने में जरूरी नियमों का पालन नहीं किया गया. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक कावागोए प्रशासन ने एक बयान जारी कर बताया,
‘मस्जिद शहर के उस इलाके में बनाई गई है, जहां आम तौर पर कंस्ट्रक्शन की अनुमति नहीं है. अगर कोई कंस्ट्रक्शन करना भी चाहता है तो इसके लिए सिटी प्लानिंग एक्ट के तहत स्पेशल परमिशन लेनी पड़ती है. लेकिन मस्जिद के लिए ऐसी कोई परमिशन नही ली गई. जबकि प्रशासन ने इससे जुड़े लोगों से नियमों का खास ध्यान रखने के लिए कहा था.’

कावागोए प्रशासन ने आगे कहा कि उसे मस्जिद गिराने के भी अनुरोध मिले हैं. फिलहाल वो मामले की समीक्षा कर रहा है. संबंधित पक्षों से बातचीत की जा रही है. इसके बाद सवाल पाकिस्तानी राजदूत पर भी उठने लगे कि उन्होंने गैरकानूनी मस्जिद का उद्घाटन क्यों किया. किरकिरी होने पर पाकिस्तानी एम्बेसी ने पूरे मामले से खुद को अलग करने की कोशिश की. एम्बेसी ने उद्घाटन कार्यक्रम में पाकिस्तानी राजदूत के पहुंचने पर भी सफाई दी. एम्बेसी ने बयान जारी कहा,
‘पाकिस्तानी दूतावास का ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट से कोई लेना-देना नहीं है. खासकर उन प्रोजेक्ट्स से, जो लोकल गवर्नमेंट्स के कानूनों का पालन नहीं करते. पाकिस्तानी राजदूत कावागोए में हुए कार्यक्रम में इसीलिए शामिल हुए थे, क्योंकि उन्हें बताया गया था कि प्रोजेक्ट के लिए सभी परमिट ले लिए गए हैं.’
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मस्जिद का अब क्या होगा?पाकिस्तानी एम्बेसी ने लोगों से नियमों का पालन करने को लेकर एक और बयान जारी किया. उन्होंने लोगों से अपील की कि पकिस्तानी समुदाय खासकर धार्मिक स्थलों के निर्माण के संबंध में कानूनी प्रक्रिया का पालन करें. लोकल गवर्नमेंट से जरूरी परमिट लिए बिना कोई भी कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया जाना चाहिए.
फिलहाल मस्जिद को गैरकानूनी मान लिया गया है और इसे गिराए जाने की पूरी संभावना है. अंतिम फैसला अब वहां के लोकल एडमिनिस्ट्रेशन को करना है. लेकिन ये पूरा मामला पाकिस्तानी समुदाय के लोगों और वहां की एम्बेसी के लिए शर्मिंदगी का सबब जरूर बन गया है.
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