उत्तर भारत अब शीतलहर की चपेट में है. पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक तापमान लगातार गिर रहा है. हर बार की तरह इस बार लद्दाख में पारा माइनस से काफी नीचे है. लद्दाख के न्योमा में न्यूनतम तापमान माइनस 20.3 डिग्री रहा. इसके अलावा कश्मीर के बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद में तापमान माइनस 9.5 बना हुआ है.
लद्दाख-हिमाचल में माइनस में पहुंचा पारा, बढ़ी ठंड, पर असली बर्फबारी तो अभी होनी बाकी ही है!
लद्दाख में -20°C तो हिमाचल में -10°C पहुंचा पारा, पंजाब-हरियाणा में भी आफत की सर्दी पड़ रही है, 10 सबसे ठंडे शहर की लिस्ट में कौन-कौन से शहर हैं? साथ ही जानिए कब हो सकती है जमकर बर्फबारी.


वहीं हिमाचल की बात करें तो ताबो में तापमान माइनस 10.6 डिग्री दर्ज किया गया. हिमाचल घूमने वालों के लिए बर्फबारी ने सड़कों पर संकट तो पैदा किया ही, ठंड भी चरम पर पहुंचती दिख रही है. किन्नौर में तापमान -4 डिग्री, नारकंडा में -2.8 डिग्री, मनाली में -0.3 डिग्री, कुफरी में 0.1 डिग्री और राजधानी शिमला में 2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया.
मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब के अदमपुर में तापमान 4 डिग्री पहुंच गया जबकि हरियाणा के नारनौल में तापमान 5.2 मापा गया. दिल्ली में न्यूनतम तापमान 8.4 डिग्री दर्ज किया गया.

पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो गई है. लद्दाख और हिमाचल से आई तस्वीरों में बर्फ की सफेद चादर दिखाई दे रही है जिसकी ठंडक मैदानी इलाकों में भी महसूस हो रही है. लेकिन इस बीच कुछ पैटर्न ऐसे भी दिखे जिन्हें सामान्य नहीं माना जा रहा. जैसे बर्फबारी के दौरान तो तापमान गिरना लाजमी है, मगर जब बर्फ नहीं गिर रही तब भी तापमान अचानक काफी नीचे गिर जा रहा है. 25 दिसंबर को कुछ ऐसा ही हुआ, जब लद्दाख में पारा माइनस 20 डिग्री से भी नीचे पहुंच गया.
मौसम विभाग की मानें तो दिसंबर में बर्फबारी होनी सामान्य है. खासतौर पर दिसंबर के दूसरे हिस्से में. मौसम विभाग के सीनियर वैज्ञानिक डॉ नरेश कुमार बताते हैं,
"सर्दियों के मौसम में एक के बाद एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस आते ही रहते हैं. जिसकी वज़ह से पहाड़ों पर बर्फ गिरती है और उत्तर भारत में बारिश होती है. लेकिन इस साल वेस्टर्न डिस्टरबेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ की संख्या कम है. अब तक कोई बड़ा डिस्टरबेंस एक्टिव नहीं हुआ है. पहला बड़ा विक्षोभ 26 दिसंबर की रात से आएगा."
मगर सवाल ये है कि जब वेस्टर्न डिस्टरबेंस लगातार नहीं आ रहे तो फिर तापमान क्यों गिर रहा है. मौसम विज्ञान कहता है कि जब वेस्टर्न डिस्टरबेंस बर्फबारी या बारिश करा रहा होता है उस वक्त रात का तापमान यानी न्यूनतम तापमान बढ़ जाता है, जबकि दिन का तापमान यानी अधिकतम तापमान में गिरावट आती है. जब एक बार विक्षोभ गुजर जाता है तो रात का तापमान गिरता है और दिन का बढ़ जाता है. एक के बाद एक आने वाले पश्चिमी विक्षोभ तापमान में इस कमी और बढ़ोत्तरी को बैलेंस करके रखते हैं. इस साल पिछले दो सालों की तरह दिसंबर महीने में वेस्टर्न डिस्टरबेंस बिल्कुल गायब तो नहीं हैं, लेकिन उनके बीच की अवधि में काफी अंतर है. इसके उलट तापमान में कमी और बढ़ोत्तरी की वज़ह दो डिस्टरबेंस के बीच के समय की वज़ह से हो सकती है.
अगर दो बर्फबारी के बीच में समय का अंतर ज़्यादा होता है तो ऐसी परिस्थिति में रात का तापमान काफी नीचे जा सकता है. कुछ ऐसा ही लद्दाख ,जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश में देखा जा रहा है. अब तक इन जगहों पर भी भारी बर्फबारी का इंतजार है. अब तक हुई बर्फबारी को मौसम विभाग हल्के से मध्यम की श्रेणी में ही जगह दे रहा है. और पहली भारी बर्फबारी 27 और 28 दिसंबर को ही होने के आसार हैं.
वीडियो: सेहत: किसी को ज्यादा तो किसी को कम ठंडी क्यों लगती है? इससे बचें कैसे?



















