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IMPACT FEATURE| अपनी बातें मनवाने के लिए कुछ चटपटे खयाल अच्छे हैं

इस होली महिलाओं के लिए कुछ स्पेशल आइडियाज, गुझिया के साथ फ्री.

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फोटो - thelallantop
भारत में महिलाएं सुपरहीरो हैं. वो पर्सनल और प्रोफेशनल लेवल पर रोज़ जंग लड़ती हैं. चुनौतियों का सामना ऐसे करती हैं जैसे कोई नहीं कर सकता. उनकी जिंदगी में चैलेंज जरूर हैं लेकिन फिर भी हमारी लेडीज ने बहुत सारी बेड़ियां तोड़ी हैं और बहुत सारे स्टीरियोटाइप्स की लंका लगाई है. आपको पता है? महिलाओं का काम करने का तरीका अलग होता है. वो कहते हैं न, घी सीधी उंगली से न निकले तो उंगली टेढ़ी करनी पड़ती है. महिलाएं सब चुनौतियों का सामना चुटकियों में कर जाती हैं, बड़े स्मार्ट तरीके से. महिलाओं, अगर समाज तुमको कहे कि तुम इस काम के लायक नहीं हो या तुम्हें नीचा दिखाने वाली चाल में फंसाने की कोशिश करे और बताए कि तुम सिर्फ शादी करके बच्चे और घर संभालने के लिए हो, तो ये हैं कुछ तरीके जिनका इस्तेमाल करके तुम उनकी चाल में उनको ही फंसा सकती हो. 1. बेटा 25 साल की हो गई हो, शर्मा जी के बेटे से शादी कर लो: 19 साल की होते ही वो बेटी पर हल्की मारक क्षमता वाले हथियार दागते हैं. उसके बाद हर बर्थडे पर मारक क्षमता बढ़ाते जाते हैं, जब तक वो 25 की न हो जाएं. यहां आता है चटपटे खयाल का नंबर. जो लड़का तुम्हें दिखाया जा रहा है उसके लिए सवालों की लिस्ट तैयार करके सौंप दो. कितनी गर्लफ्रेंड्स रहीं, पहली किस, पहला ब्रेकअप, लास्ट गर्लफ्रेंड ने क्यों छोड़ा, फेमिनिज्म और वर्किंग महिलाओं पर उसके विचार, सब पूछ डालो. उसके जवाब को अच्छे से ऑब्जर्व करो और फिर अपने मम्मी पापा से उस पर शांति वाली डिबेट करो, जिसको कहते हैं हेल्दी कनवर्सेशन. उसकी अच्छाइयों-बुराइयों पर बात करो. मम्मी-पापा से बेहतर आपको कौन समझ सकता है. है न? 2. आर्ट्स ही क्यों, साइंस क्यों न पढ़ें? टीचर ही क्यों, डॉक्टर क्यों न बनें? उफ़... कितनी बार ये बकवास लोगों से सुनी है. तुम हमेशा इन्हें निराश कर देती हो क्योंकि मिश्रा जी की बेटी ने तो कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की और शालू बुवा की बिटिया बैंक की 9 से 5 वाली नौकरी करके अच्छा पैसा कमा रही है. अब खुद को देखो. वो महिलाओं के लिहाज़ से सम्मानित नौकरियां हैं. ये 'सम्मानित' या इज्जतदार वाला खांचा हमारे समाज ने बनाया है. अब तुम क्या करोगी? अपने सपनों को बहा दोगी? नहीं, हरगिज नहीं. क्यों नहीं 'डॉक्टर ऑफ आर्ट्स' बन जाती? या फिर एक 'बायोलजी टीचर?' है न चटपटा खयाल? 3. अच्छे घर की लड़कियां कम बोलती हैं यहां तुम फंस गई हो. यही बोलकर कितनी बार तुम्हारा गला घोंटा गया है. सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक मसलों पर बात करने की इजाज़त तुम्हें नहीं है. हां, तुम बैंगन के भरते की रेसिपी डिसकस कर सकती हो. लेकिन तुम्हारे पास ओपीनियन की बाढ़ आई हुई है, हर मुद्दे पर तुम्हारे दिमाग में बहुत सारे विचार हैं. तुम्हारा जवाब है यूट्यूब और एक धांसू क्वालिटी के फ्रंट कैमरे वाला फोन. जिन मुद्दों में तुम्हारा इंट्रेस्ट हो उन पर अपना ओपीनियन दो, यूट्यूब वीडियोज बनाओ और वायरल करो. इंटरनेट सेंसेशन बन जाओ. अपने चटपटे खयाल पूरी दुनिया तक पहुंचाओ क्योंकि अपने विचारों को आवाज देना कहीं से गलत नहीं है. 4. गुझिया को हाथ मत लगाओ, मोटी हो गई तो तुमसे कौन शादी करेगा? लेकिन डियर लेडीज, तुम्हें खाना खूब पसंद है. तो तुम्हें क्या करना है? सो सिंपल. एक कैलोरी चार्ट बनाओ और उसको ऐसी जगह लगाओ जहां से सभी को साफ साफ दिखाई दे. हो सके तो डिनर टेबल के पास चिपकाओ. इस होली, जब कोई पूरियों पर हाथ मारने की कोशिश करे, या मटर पनीर Khaaney को दौड़े, या दम आलू पर लार टपकाए, उसको तुरंत कैलोरी चार्ट दिखाओ. कैलोरीज का हिसाब करके बताओ और कहो- "आपकी प्लेट में 700 कैलोरी भरी रखी है. क्या पक्का ये सब खाना चाहते हो आप? ये पूरी 230 कैलोरी की पड़ रही है बुवा जी." अब जब सबको कैलोरी के बारे में बराबर जागरुक कर चुकी हो और tasty खाने के लिए लार टपकाते हुए लोगों को सलाद खाने को मजबूर कर चुकी हो तो एक पैकेट गुझिया उठाओ और एंजॉय करो. क्योंकि इसी तरह खुद को सेलिब्रेट किया जाता है. ऐसे तमाम चटपटे खयाल लेकर लखनऊ, कानपुर, मेरठ, बहराइच, बलरामपुर और कन्नौज जैसे यूपी के तमाम शहरों और कस्बों में देश का सबसे चटपटा कुरकुरे आ रहा है. हजार से ज्यादा गांव और शहरों में नुक्कड़ नाटक करने और फिल्में दिखाने. कुरकुरे का 'कारवां टॉकीज' महिलाओं की कहानियों को, उनको दिमाग खोलने वाले आधुनिक विचारों को नाटकों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाएगा. तो इस होली अगर आप उन्हें अपने शहर में देखो तो शो एंजॉय करो और अपनी टेस्टी गुझिया उनको भी खिलाओ.

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