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अमरनाथ यात्रा हमले के वक्त बस सलीम चला रहे थे या हर्ष, सच्चाई यहां जानिए

गुजरात के एक बड़े अखबार में दावा किया गया है कि बस हर्ष चला रहे थे.

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फोटो - thelallantop

अनंतनाग में अमरनाथ से लौट रहे लोगों पर आतंकी हमला हुआ. हमले में सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई, 19 से ज्यादा घायल हो गए. इस सबके बीच एक आदमी की बहुत तारीफ हुई, वो हैं बस के ड्राइवर. लेकिन बस का ड्राइवर कौन था, इस पर झगड़ा हो रहा है. ये झगड़ा इसलिए ज्यादा हो रहा है क्योंकि इसमें दो नाम हैं, सलीम या हर्ष.

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शुरू में आई खबरों के मुताबिक बस के ड्राइवर सलीम ने बताया कि गोलियां चलने के बावजूद उन्होंने बस नहीं रोकी और वो तभी रुके, जब उन्हें सेना के जवान दिखे. बस में अधिकांश यात्री गुजरात के थे, जिन्हें इलाज के बाद वायुसेना के विमान से वापस भेजा गया. इन यात्रियों के साथ सलीम के गुजरात पहुंचने के बाद गुजराती अखबार 'दिव्य भास्कर' की वेबसाइट ने दावा किया कि बस सलीम नहीं, बल्कि हर्ष देसाई चला रहे थे.

हर्ष देसाई बस के मालिक जवाहर देसाई के बेटे हैं, जो हमले के वक्त बस में मौजूद थे. गुजरात पहुंचने के बाद कई अखबारों और चैनलों ने हर्ष और सलीम, दोनों से बात की. गुजराती अखबार दिव्य भास्कर ने हर्ष देसाई से बातचीत का हवाला देते हुए अपनी वेबसाइट पर एक आर्टिकल पब्लिश किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि बस सलीम नहीं, बल्कि खुद हर्ष चला रहे थे. देखिए:

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इसमें गुजराती में लिखी हेडिंग હર્ષે 25 આતંકીના ઘેરામાંથી બસ કાઢી, બે ગોળી વાગી છતાં 45ના જીવ બચાવ્યા का मतलब है, दो गोलियां लगने के बावजूद हर्ष 25 आतंकियों के बीच से बस निकाल लाए और 45 श्रद्धालुओं की जान बचाई


आर्टिकल का पहला पैराग्राफ, जिसमें लिखा है कि हर्ष और कंडक्टर ने 45 यात्रियों की जान बचाई
आर्टिकल का पहला पैराग्राफ, जिसमें लिखा है कि हर्ष और कंडक्टर ने 45 यात्रियों की जान बचाई.

आर्टिकल के इस पहले पैराग्राफ में लिखा है, 'सोमवार रात को श्रीनगर में आतंकवादियों ने अमरनाथ यात्रा करके ओम ट्रैवेल्स की बस से लौट रहे गुजराती श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया. बस के ड्राइवर और टूर ऑपरेटर हर्ष देसाई ने दिव्य भास्कर के साथ खास बातचीत में बताया कि जब उन्हें पता चला कि ये आतंकी हमला है, तो उनका दिमाग सुन्न हो गया. बस को 25 आतंकियों ने घेर रखा था, लेकिन वो बस चलाते रहे और उनके बीच से निकाल लाए. एक आतंकी ने बस में घुसने की कोशिश भी की, लेकिन कंडक्टर ने उसे धक्का देकर गिरा दिया और दरवाजा बंद कर लिया. अगर वो आतंकी बस में घुस जाता, तो कोई नहीं बचता. हर्ष और बस के कंडक्टर ने बहादुरी से 45 लोगों की जान बचाई. जब पांच किलोमीटर बाद उन्हें आर्मी की कार दिखी, तो उन्होंने बस रोक दी.'

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दिव्य भास्कर ही नहीं, कुछ और वेबसाइट्स ने भी यही दावा करते हुए बाकी मीडिया को कोसा कि वो सलीम को जबरन हीरो बना रहे हैं.

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सोशल मीडिया पर तो हद ही पार हो गई. लोग सलीम और हर्ष को छोड़कर उनका मजहब बीच में ले आए और अनाप-शनाप लिखने लगे.

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इनमें से किसी के भी दावे को सही या गलत बताने के बजाय हम आपको वो वीडियो दिखाएंगे, जिसमें ये दोनों अपनी-अपनी बात कह रहे हैं. पहले देखिए सलीम का वीडियो, जिसमें उन्होंने बताया कि उस रात क्या हुआ था:-

सलीम बताते हैं, 'राइट से आकर हमारे ऊपर हमला किया और इतनी जोरदार गोलीबारी हुई कि मैं फटाक से दरवाजा बंद कर आया और टेढ़े होकर गाड़ी चलाया, जिसकी वजह से हर्ष भाई को गोली लगी.'

अब देखिए हर्ष का वीडियो:-


इस वीडियो के यहां न चलने पर आप इसे
देख सकते हैं

हर्ष कह रहे हैं, 'हम 70-80 की स्पीड से बस लेकर जा रहे थे, अचानक फायरिंग होने लगी. जैसे ही फायरिंग हुई, तो पहले तो लगा कि पटाखे फूट रहे हैं, फिर देखा कि गोली मुझे भी लगी. बाद में मैं सलीम भाई को बोला कि गाड़ी रोकना मत... चलाओ चलाओ. आगे ही जाने दो. जहां मिलिट्री मिलेगी, वहां रोक देना. हमें दो किलोमीटर बाद मिलिट्री कैंप मिला. मुझे तीन गोलियां लगीं.'

दिलचस्प बात ये है कि दिव्य भास्कर के परिवार की एक और वेबसाइट दैनिक भास्कर पर लगे आर्टिकल्स में ये लिखा है कि बस सलीम चला रहे थे. साथ ही, उनके परिवार की तस्वीरें और बयान भी लगाए गए, जिसमें वो सलीम की बहादुरी और उनके जिंदा लौटने से खुश हैं. सलीम की पत्नी का कहना है कि भले हमले होते रहें, लेकिन वो अपने पति को फिर अमरनाथ जाने के लिए कहेंगी.


दैनिक भास्कर के उस आर्टिकल का पहला पैराग्राफ
दैनिक भास्कर के उस आर्टिकल का पहला पैराग्राफ

सलीम खुद तो बस चलाने का दावा कर ही रहे हैं, हर्ष भी अपने वीडियो में ये कहते नज़र आ रहे हैं कि उन्होंने सलीम से बस चलाते रहने को कहा था. हमले के दौरान बस में जो लोग मौजूद थे, उनके गुजरात पहुंचने पर जब उनसे घटना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि बस सलीम ही चला रहे थे.

सलीम की कहानी सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर के गवर्नर ने उनके लिए छह लाख रुपए के इनाम की घोषणा की. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने भी सलीम के लिए ब्रेवरी अवॉर्ड की घोषणा की है.

देखिए सलीम की कहानी पता चलने के बाद उनके घरवालों का कैसा रिएक्शन था...


 


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