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90% साक्षर केरल में हर उम्र के लोगों को नशे की लत, 10 साल के बच्चे भी चपेट में

केरल विधानसभा में नशे की समस्या को लेकर चर्चा हुई. राज्य की विपक्षी पार्टियों ने पिनराई सरकार से कार्रवाई करने की मांग की. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम पिनराई विजयन ने मुख्य सचिव को राज्य में एक नशा-विरोधी मुहिम का खाका तैयार करने का निर्देश दिया है.

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केरल में ड्रग्स की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है. (तस्वीर:इंडिया टुडे/प्रतिकात्मक)

केरल में नशे की समस्या तेजी से बढ़ रही है. इसके कारण वहां हिंसक अपराधों में भी वृद्धि देखी जा रही है. मामले की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि 2023 की तुलना में 2024 में 45% अधिक बच्चों को नशा मुक्ति के लिए भर्ती कराया गया है. इस तरह के कई आंकड़े राज्य के आबकारी मंत्री एमबी राजेश ने विधानसभा में दिए हैं.

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केरल विधानसभा में नशे की समस्या को लेकर चर्चा हुई. राज्य की विपक्षी पार्टियों ने पिनराई विजयन सरकार से कार्रवाई करने की मांग की. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम विजयन ने मुख्य सचिव को राज्य में एक नशा-विरोधी मुहिम का खाका तैयार करने का निर्देश दिया है.

एमबी राजेश ने विधानसभा में 24 मार्च को बताया कि जनवरी-फरवरी में 588 बच्चों को राज्य के नशा-मुक्ति केंद्रों में इलाज के लिए लाया गया है. चिंताजनक बात ये है कि इन बच्चों की उम्र 18 साल से कम है. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में 1,982 बच्चों को नशा-मुक्ति के लिए भर्ती कराया गया था, जबकि 2024 यानी एक साल में यह आंकड़ा बढ़कर 2880 हो गया. ये पिछले साल की तुलना में 45% ज्यादा है.

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एमबी राजेश ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि ड्रग माफिया राज्य पर पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं और सरकार स्थानीय समुदायों और एजेंसियों के जरिए सामाजिक प्रतिरोध बनाने की कोशिश में जुटी है.

केरल में साल 2024 में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत 27,530 मामले दर्ज किए गए.  पुलिस ने बीते दिनों एक सर्वे के आंकड़े जारी किए. इसके मुताबिक, राज्य के 472 पुलिस स्टेशन थानों में 1,377 ड्रग बेचने के ठिकाने चिह्नित किए गए हैं.

इनमें से अकेले 235 ठिकाने राजधानी तिरुवनंतपुरम में हैं. आबकारी विभाग ने तिरुवनंतपुरम के कुछ स्कूलों को जांच के दायरे में लाने का प्रयास किया था, लेकिन इसको लेकर कुछ हाईप्रोफाइल संस्थानों के प्रबंधन की ओर से आपत्तियां आ गईं.

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सिंथेंटिक ड्रग्स अधिक पसंद

एक वरिष्ठ आबकारी अधिकारी ने इंडिया टुडे को बताया कि केरल में युवा अब सिगरेट और शराब की जगह सिंथेटिक ड्रग्स पसंद करते हैं. जनवरी 2024 से जनवरी 2025 यानी एक साल में केरल के आबकारी विभाग ने भारी मात्रा में ड्रग्स जब्त की. रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें 4,370 किलो गांजा, 35 किलो एमडीएमए, 5.8 किलो मेथमफेटामाइन, 7.7 किलो हशीश तेल, 502 ग्राम एलएसडी, 264 ग्राम ब्राउन शुगर, 600 ग्राम चरस और 368 ग्राम नाइट्राजेपम शामिल हैं.

आजतक की मार्च, 2025 में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, परंपरागत ड्रग्स, जैसे गांजा और इंजेक्शन अभी भी प्रचलन में हैं, लेकिन सिंथेटिक ड्रग्स क्रिस्टल और MDMA के इस्तेमाल में इजाफा हो गया है. इन ड्रग्स, खासकर MDMA की सप्लाई बेंगलुरू और चेन्नई से होती है.

राज्य के आबकारी विभाग ने कुछ महीने पहले एक सर्वे किया था. इस सर्वे में 62,691 लोग शामिल हुए थे. मालूम पड़ा कि 9% लोगों ने 10 साल की उम्र से पहले, 70% लोगों ने 15 साल की उम्र तक और 20% ने 19 साल की उम्र तक ड्रग्स का सेवन कर लिया था. सर्वे में शामिल 46% लोगों ने कहा कि वे दिन में कई बार ड्रग्स लेते हैं, 35% ने कहा कि वे तनाव कम करने के लिए ड्रग्स लेते हैं.  

केरल में ड्रग्स का रैकेट स्कूल कॉलेजों तक पहुंच गया है. बीते दिनों केरल हाई कोर्ट के जज जस्टिस वीजी अरुण ने कहा था कि हम उस स्थिति तक पहुंच गए हैं, जहां विधानसभा को अपना सामान्य कामकाज स्थगित करना पड़ा ताकि इस सामाजिक समस्या पर विचार किया जा सके.

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