राहुल ने कहा था कि कांग्रेस सरकार को 11वां दिन हो जाए और कर्ज माफी न हो तो मुख्यमंत्री बदल दिया जाएगा. जब राहुल ये सब कह रहे थे, तो मंच पर कमल नाथ भी मौजूद थे. कमल नाथ अब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं. और बतौर मुख्यमंत्री उनका पहला फैसला रहा किसानों के 2 लाख तक के कर्ज माफ करना. ये सुनकर शिवराज सिंह चौहान खुश हुए होंगे. हार स्वीकारते हुए उन्होंने कहा था कि वो भी कर्ज माफी के लिए दस दिन का इंतज़ार करेंगे.

कर्ज माफी के कागज़ों पर दस्तखत करते कमलनाथ. (फोटोःएएनआई)
मज़े की बात ये रही कि कमलनाथ ने ये आदेश देने से पहले वल्लभ भवन की उसी एनेक्सी का उद्धाटन किया, जिसका निर्माण शिवराज सिंह चौहान ने बड़े अरमानों से करवाया था, लेकिन जिसका उद्धाटन उनके सीएम रहते हो नहीं पाया. बहरहाल, इसके बाद कमलनाथ सीएम आफिस गए और कर्जमाफी के कागज़ों पर दस्तखत किए. इसके बाद मध्यप्रदेश शासन में प्रमुख सचिव (किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्रालय) राजेश राजोरा ने कर्ज माफी का आदेश निकाल दिया.
इस आदेश के मुताबिक 'पात्रता अनुसार पात्र पाए गए' किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ होगा. इस आदेश के बारे में खासम-खास बातें ये रहीं -
कौनसा कर्जा माफ होगा?
जो सरकारी बैंकों या सहकारी संस्थाओं से लिया गया होगा.
किनका माफ होगा?
ये साफ नहीं है. पहले लग रहा था कि सिर्फ छोटी जोत वाले किसानों का कर्ज माफ होगा. लेकिन आदेश में किसानों की श्रेणी का ज़िक्र नहीं है. तो ये माना जा रहा है कि सभी किसानों का 2 लाख माफ हुआ है. वैसे सरकार जब विस्तृत आदेश निकालेगी तो इसमें किंतु-परंतु लग जाएंगे.
कितना पैसा चाहिए इस माफी के लिए?
मध्यप्रदेश के किसानों पर तकरीबन 75, 000 करोड़ का कर्ज है. सरकार के आदेश का जो मतलब फिलहाल समझ आता है, उस हिसाब से तकरीबन 50, 000 करोड़ रुपए की कुल कर्ज माफी हो सकती है. मध्यप्रदेश सरकार का इस साल का कृषि बजट 37, 498 करोड़ है. कुल बजट 1,86,685 करोड़ है. तो कर्ज माफी सरकार के कुल बजट का आधा हिस्सा खा सकती है.
कर्ज माफी के फैसले के बाद कमलनाथ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की. इसमें उन्होंने सरकारी बैंकों पर तंज कसते हुए कहा कि बैंकों को उद्योगपतियों का कर्ज माफ करने में कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन किसानों का कर्ज माफ करने के समय उनके पेट में दर्द होने लगता है.
कमलनाथ के दो और बड़े फैसले
कर्ज माफी के अलावा मध्यप्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत मिलने वाली अनुदान राशि को भी बढ़ाकर 51000 रुपये कर दिया है. इसके साथ ही उद्योगों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करने करने वाली स्कीम (जैसे सस्ती ज़मीन, टैक्स में छूट वगैरह) अब तभी लागू होंगी, जब 70 प्रतिशत रोजगार मध्यप्रदेश के लोगों को दिया जाएगा.
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