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मुंबई एयरपोर्ट पर उतरते ही डॉक्टर कफील खान गिरफ्तार
12 दिसंबर 2019 को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भड़काऊ बयान देने का आरोप.
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डॉक्टर कफील खान को मुंबई में गिरफ्तार किया गया. (बाएं)
डॉ. कफील खान. फिर चर्चा में हैं. वजह एक बार फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है. 29 जनवरी की देर रात डॉक्टर कफील को मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया. उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने उन्हें गिरफ्तार किया. आरोप है कि उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA को लेकर भड़काऊ बयान दिया. 12 दिसंबर 2019 को. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में. गिरफ्तारी वाले दिन डॉक्टर कफील ने बिहार में CAA और प्रस्तावित NRC और NPR के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को संबोधित किया था. कफील खान गुरुवार को मुंबई स्थित 'मुंबई बाग' में हो रहे प्रदर्शन में शामिल होने के लिए गए थे. 'मुंबई बाग' में CAA के खिलाफ प्रदर्शन कर रहीं महिलाएं अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. कफील खान को 30 जनवरी को 11 बजे प्रदर्शन स्थल पर जाना था, लेकिन इससे पहले ही UPSTF ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. मुंबई में फ्लाइट से उतरते ही उन्हें कस्टडी में ले लिया गया. और एयरपोर्ट से सहर पुलिस स्टेशन ले जाया गया. एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि एसटीएफ गुरुवार यानी 30 जनवरी को डॉक्टर खान को वापस यूपी ले जाएगी. हालांकि जानकारी के अनुसार, STF की टीम उन्हें लखनऊ लेकर आ चुकी है.
डॉक्टर कफील ने 12 दिसंबर को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में एक रैली को संबोधित किया था. उसके एक दिन बाद यानी 13 दिसंबर को सिविल लाइन थाने में उनके खिलाफ केस दर्ज कराया गया था. शिकायत में यूपी पुलिस ने डॉ खान पर आरोप लगाया कि 12 दिसंबर को शाम 6.30 बजे यूनिवर्सिटी के बाब-ए-सैयद गेट पर 600 मुस्लिम छात्रों को संबोधित किया था. आरोप है कि उन्होंने इस दौरान छात्रों को भड़काया. भाषण रिकॉर्ड करने वाली पुलिस का कहना है कि डॉक्टर कफील ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की.सांप्रदायिक तनाव भड़काने का प्रयास किया. डीजीपी ओपी सिंह ने ने बताया कि डॉक्टर कपिल खान को हेट स्पीच की वजह से गिरफ्तार किया गया. उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. हम लोग उनको ट्रैक कर रहे थे. एसटीएफ को यह काम दिया गया था. जब हमें पता चला कि वह मुंबई में हैं तो हमारी टीम ने वहां गिरफ्तार किया. पूरी न्यायिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तारी हुई है और उन्हें अलीगढ़ लाया जाएगा. मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा.' साल 2017. अगस्त महीने में गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में कई नवजात बच्चों की एक साथ मौत हुई थी. मौत का कारण पता चला था कि अस्पताल में ऑक्सीजन ख़त्म हो गया था. और समय पर ऑक्सीजन न मिलने से इन बच्चों की मौत हो गई. यूपी सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऑक्सीजन का बकाया बिल नहीं चुकाया गया था. इस वजह से ऑक्सीजन का बिल नहीं चुकाया जा सका था. इस मामले में शुरुआत से ही मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर कफील अहमद खान की भूमिका पर सवाल उठते रहे. डॉक्टर खान ने कहा था कि उन्होंने बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए ऑक्सीजन सिलिंडरों का इंतजाम किया था. कई जगहों पर संपर्क किया था ऑक्सीजन का इंतजाम करने के लिए. लेकिन मामले की जांच की शुरुआत में ही यूपी सरकार द्वारा गठित जांच एजेंसी ने आरोप लगाए थे कि कफील अहमद खान की भूमिका संदिग्ध हैं. उन पर वित्तीय अनियमितता, अनदेखी और भ्रष्टाचार के तहत जांच बिठाई गयी. 22 अगस्त 2017 को सस्पेंड हो गए. इस मामले में कफील खान 9 महीने जेल में रह चुके हैं. जब ये मामला सामने आया था तो यूपी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बयान दिया था कि अगस्त में बच्चे मरते ही हैं.
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