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'RSS में था फिर से वहीं जाउंगा' कलकत्ता हाईकोर्ट के जज ने रिटायरमेंट के बाद का प्लान बता दिया

Kolkata High Court के पूर्व न्यायाधीश Chitta Ranjan Dash ने कहा कि अपने काम की वजह से उन्होंने खुद को 37 सालों तक RSS से दूर रखा.

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न्यायाधीश चितरंजन दास रिटायर हो गए. (तस्वीर साभार: बार एंड बेंच)

न्यायाधीश चितरंजन दास (justice Chitta Ranjan Dash) कलकत्ता हाई कोर्ट (Kolkata High Court) से रिटायर हो गए. 20 मई को अपने विदाई भाषण में उन्होंने कहा कि अब वो वापस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में शामिल हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि वो पहले भी RSS के सदस्य थे और अब अगर उनको बुलाया गया तो वो संगठन में वापस जाने के लिए तैयार हैं.

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उन्होंने कहा,

“आज, मुझे अपना असली रूप दिखाना होगा. मैं एक संगठन का बहुत आभारी हूं. मैं बचपन से लेकर युवावस्था तक वहां रहा हूं. अपनी पूरी युवावस्था में मैंने साहसी और ईमानदार बनना सीखा है. दूसरों के लिए समान दृष्टिकोण रखना सीखा है. और सबसे बढ़कर, देशभक्ति की भावना और काम के प्रति कमिटमेंट सीखा है, चाहे आप जहां भी काम करें. कुछ लोगों को ये पसंद नहीं आएगा. इसके बावजूद, मुझे ये स्वीकार करना होगा कि मैं RSS का सदस्य था और हूं.”

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पूर्व न्यायाधीश ने आगे कहा,

“मैंने अपने काम की वजह से खुद को लगभग 37 साल तक संगठन से दूर रखा था. मैंने अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए संगठन की सदस्यता का कभी इस्तेमाल नहीं किया. क्योंकि ये संगठन के सिद्धांतों के खिलाफ है. मैंने सभी के साथ समान व्यवहार किया है. चाहे वो अमीर हो, गरीब हो, कम्युनिस्ट हो, भाजपा का हो, कांग्रेस का हो या TMC का हो. मेरे सामने सभी समान हैं और मेरे आचरण से आपने देखा होगा कि मेरे मन में किसी के लिए कोई पक्षपात नहीं है.” 

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पूर्व न्यायाधीश चितरंजन दास ने कहा कि उन्होंने दो सिद्धांतों पर न्याय करे का प्रयास किया है. उन्होंने बताया,

"मैं दो सिद्धांतों पर न्याय करने का प्रयास करता हूं. पहला है सहानुभूति, दूसरा ये कि न्याय करने के लिए कानून को तोड़ा जा सकता है, लेकिन कानून के अनुकूल न्याय को नहीं तोड़ा जा सकता. मैंने अपने जीवन में कुछ भी गलत नहीं किया है. इसलिए मुझे ये कहने का साहस मिला कि मैं संगठन से जुड़ा हूं. क्योंकि ये भी गलत नहीं है. अगर मैं एक अच्छा इंसान हूं, तो मैं किसी बुरे संगठन से नहीं जुड़ सकता."

कौन हैं चितरंजन दास?

पूर्व न्यायाधीश चितरंजन दास का जन्म ओडिशा के सोनपुर में 1962 में हुआ. स्कूली शिक्षा उल्लुंडा में की. ढेंकनाल और भुवनेश्वर में अपनी उच्च शिक्षा पूरी की. इसके बाद उन्होंने 1985 में कटक से कानून की पढ़ाई की. कलकत्ता हाईकोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, उन्होंने 1986 में वकील के रूप में काम करना शुरू किया. और 1992 में उन्हें राज्य सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील के रूप में नियुक्त किया गया. इस पद पर उन्होंने 1994 तक काम किया.

फरवरी 1999 में वो उड़ीसा सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस (सीनियर ब्रांच) में शामिल हुए. अक्टूबर 2009 में उन्हें प्रमोशन मिला और उड़ीसा हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया. इसके बाद जून 2022 में उनका ट्रांसफर कलकत्ता HC में न्यायाधीश के रूप में किया गया.

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